अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस विशेष: छत्तीसगढ़ का ‘उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व’ दे रहा वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद, जंगलों में दिखने लगे अब बाघ

गरियाबंद/मैनपुर: हर साल 29 जुलाई को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बाघों की घटती संख्या को लेकर लोगों को जागरूक करना और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस वर्ष जहाँ एक ओर भारत वैश्विक स्तर पर बाघ संरक्षण के एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा है, वहीं छत्तीसगढ़ का ‘उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व’ (Udanti Sitanadi Tiger Reserve) भी जंगलों की रौनक और वन्यजीव संरक्षण को लेकर चर्चा के केंद्र में है।
छत्तीसगढ़ का गौरव: उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व
गरियाबंद जिले में फैला उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने साल और मिश्रित वनों के लिए जाना जाता है। वर्ष 2009 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत गठित यह रिजर्व लगभग 1842.54 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। उदंती और सीतानदी नदियों के नाम पर बने इस टाइगर रिजर्व का उद्देश्य न केवल बाघों बल्कि यहाँ के अनमोल वन्यजीवों और औषधीय वनस्पतियों की रक्षा करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बाघों के रहवास के लिए बेहद अनुकूल है। हालांकि, बीच के वर्षों में यहां बाघों की संख्या और सुरक्षा को लेकर कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साझा प्रयासों से यहाँ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार सुधार हो रहे हैं। वन अमले द्वारा गश्त बढ़ाने, जंगलों को आग से सुरक्षित रखने और स्थानीय ग्रामीणों को ‘वन मितान’ के रूप में जोड़ने से सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
भारत की वैश्विक उपलब्धि
गौरतलब है कि साल 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए टाइगर समिट में यह संकल्प लिया गया था कि दुनिया भर में बाघों की संख्या को दोगुना किया जाएगा। आज भारत इस दिशा में सबसे आगे है। देश में कुल बाघों की संख्या बढ़कर 3,600 के पार पहुंच चुकी है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 75 प्रतिशत है। देश के इन तमाम प्रमुख टाइगर रिजर्व्स में उदंती सीतानदी जैसी रिजर्व्स की भूमिका बेहद अहम है, जो देश के वन क्षेत्र को मजबूत करते हैं उदंती सीतानदी को पुनः संवारने DFO वरुण जैन और पूरी वन विभाग की टीम के उत्कृष्ट सराहनीय कार्यकुशल दूरदर्शी और सख्त नेतृत्व में विभाग ने जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण में एक मिसाल कायम की है।जमीनी मुस्तैदी पूरी वन विभाग की टीम ने दिन-रात एक करके अवैध कटाई, अतिक्रमण और वन्यजीवों के शिकार जैसी गतिविधियों पर प्रभावी लगाम लगाई है।पर्यावरण संरक्षण: वनों के घनत्व को बढ़ाने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को संतुलित रखने में इस टीम का योगदान बेहद प्रशंसनीय है।जन-जागरूकता: आम नागरिकों को पर्यावरण और पेड़ों के महत्व के प्रति जागरूक करने में भी टीम ने सराहनीय पहल की है वरुण जैन और उनकी पूरी टीम की यह निष्ठा, मेहनत और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।
संरक्षण के मोर्चे पर अभी भी चुनौतियां और उम्मीदें
स्थानीय पर्यावरणविदों का मानना है कि उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या को और बढ़ाने के लिए उनके प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखना, अवैध शिकार पर पूरी तरह रोक लगाना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना बेहद जरूरी है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि जंगल और वन्यजीव केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे अपने अस्तित्व का आधार हैं। उदंती सीतानदी जैसे रिजर्व्स की सुरक्षा का संकल्प ही हमारे पर्यावरण के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है।






