- आजादी के बाद पहली बार दुर्गम पहाड़ियों पर पहुंचे अधिकारी: कुल्हाड़ीघाट के ग्रामीणों में जगी विकास की उम्मीद

गरियाबंद (मैनपुर): जिले के मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत अति पिछड़ी कमार जनजाति बहुल ग्राम पंचायत कुल्हाड़ीघाट के सुदूर पहाड़ी अंचल में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम हुआ। कभी नक्सलियों का गढ़ रहे और लंबे समय तक दहशत के साये में रहने वाले ताराझर और कुरवापानी गांव में पहली बार जिला प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर की अगुवाई में प्रशासनिक अमले का यह दौरा ग्रामीणों के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है।
दुर्गम रास्तों को पार कर ग्रामीणों के बीच पहुंचे अफसर
मैनपुर ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 18 किमी दूर स्थित कुल्हाड़ीघाट ग्राम पंचायत के अंतर्गत ताराझर और कुरवापानी गांव आते हैं। इन गांवों तक पहुंचने के लिए ओड़िशा के रास्ते लगभग 60-65 किमी का सफर और उसके बाद 2-3 किमी का दुर्गम पगडंडी मार्ग पार करना पड़ता है। आजादी के बाद से अब तक इन गांवों में कभी ब्लॉक स्तर के अधिकारी भी नहीं पहुंचे थे। पहली बार जिले के बड़े अधिकारियों को अपने बीच पाकर आदिवासी ग्रामीण भावुक हो गए और उनका आत्मीय स्वागत किया।

पेयजल संकट और वन्यप्राणियों का डर
चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने अपनी बदहाली की दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि पेयजल की गंभीर समस्या: ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए सूखी नदी में ‘झरिया’ खोदकर पानी निकालना पड़ता है, जो बेहद असुरक्षित है।
वन्यप्राणियों का भय: गांव के दुर्गम रास्तों पर हमेशा हिंसक वन्यप्राणियों का डर बना रहता है, जिससे अकेला निकलना दुभर है।
राशन की जद्दोजहद: राशन लेने के लिए ग्रामीणों को 35-40 किमी पैदल या घोड़ों के सहारे ओड़िशा या कुल्हाड़ीघाट तक जाना पड़ता है।

प्रशासन का एक्शन मोड: मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान
ग्रामीणों की पीड़ा सुनने के बाद जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने त्वरित कदम उठाते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए:
कुओं को मंजूरी: ग्राम में तत्काल प्रभाव से चार नए सरकारी कुओं के निर्माण की स्वीकृति दी गई।
सामग्री वितरण: स्कूली बच्चों को पाठ्य सामग्री, गणवेश, जूते और बैग वितरित किए गए और उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया गया।
योजनाओं की हकीकत: प्रधानमंत्री आवास, आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल भवनों का भौतिक निरीक्षण कर शासन की योजनाओं की जमीनी हकीकत जानी गई।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सरपंच बनसिंग सोरी और ग्रामीणों ने मुख्य रूप से बोतलधारा मार्ग से सड़क निर्माण की मांग रखी, ताकि आपातकालीन स्थिति में गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल तक समय पर पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही, ग्रामीणों ने पिछले 6 वर्षों से बंद पड़ी सौर ऊर्जा प्रणाली को ठीक करने की भी गुहार लगाई।
प्रशासनिक आश्वासन
सीईओ ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन-प्रशासन सुदूर वनांचल में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने समस्याओं के चरणबद्ध निराकरण का भरोसा दिया। इस दौरान जनपद सीईओ जे.के. गजभिये, परियोजना अधिकारी कपिल नायक, बीएमओ डॉ. गजेन्द्र ध्रुव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक टीम मौजूद रही।






