आजादी के 80 साल, पर शिक्षा के नाम पर सिर्फ लाचार तंत्र का हाल: रूवाड़ में सड़क पर तिरंगा फहराने को मजबूर हुए मासूम, बहरे अफसर तानकर सो रहे चादर

अब भी कुंभकर्णी नींद में सो रहा प्रशासन: गरियाबंद के रूवाड़ में फूटा छात्रों और पालकों का भयंकर आक्रोश!
जर्जर स्कूल के खिलाफ 6 दिन से तालांबंदी, स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल के बाहर तिरंगा फहराने को मजबूर हुए मासूम
गरियाबंद: जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र रसेला-रूवाड़ में शिक्षा विभाग की घोर लाचारी और प्रशासनिक नकारापन का ऐसा खौफनाक मंजर सामने आया है, जिसने सिस्टम की नींव हिलाकर रख दी है। मूलभूत सुविधाओं और नए स्कूल भवन की मांग को लेकर सैकड़ों छात्र-छात्राओं और पालकों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पिछले 06 दिनों से स्कूल में ताला जड़कर आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन जिला स्तर के जिम्मेदार अफसर एयरकंडीशन कमरों में बैठकर गहरी नींद ले रहे हैं मानो उन्हें किसी बड़े हादसे या उग्र जनआंदोलन का इंतजार हो जहाँ पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, वहीं रूवाड़ के भविष्य यानी मासूम छात्र और उनके पालक अपनी ही सरकार के बहरे तंत्र के खिलाफ सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे। स्थिति इतनी वीभत्स थी कि 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के पावन पर्व पर बच्चों को स्कूल के भीतर जाने तक नहीं दिया गया, और मजबूर होकर उन्हें स्कूल भवन के बाहर जमीन पर ही ध्वजारोहण करना पड़ा।
सिस्टम का काला सच: जान जोखिम में डालकर टिन शेड के नीचे पढ़ रहे बच्चे
ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों यशवंत सोरी, ग्राम पटेल कृष्ण कुमार ठाकुर, उदेराम नेताम, अलाल सिंह नागेश सहित अन्य ने सरकार और शिक्षा तंत्र की पोल खोलते हुए बताया कि:
सरकार द्वारा बनाया गया मिडिल स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर और खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसी जर्जर और जानलेवा भवन में हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित किया जा रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों ने चंदा एकत्र कर 2 लाख रुपये की लागत से एक टिन शेड बनवाया, जिसके नीचे बैठकर आज भी नौनिहाल अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और जिले के आला अफसरों को अनगिनत बार लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन सिर्फ कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला!
विकास के झूठे दावों और डिजिटल भारत के दावों का पर्दाफाश
एक तरफ सरकारें शहरों में हाई-टेक और डिजिटल क्लास चलाने के बड़े-बड़े ढिंढोरा पीट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आदिवासी वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को न तो छत नसीब हो रही है और न ही पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का यह उदासीन और तानाशाही रवैया अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। अधिकारियों की यह आपराधिक सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी! अगर जल्द से जल्द बच्चों की इस जायज मांग पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह चिंगारी पूरे जिले में एक विकराल जनआंदोलन का रूप ले लेगी।”
आदिवासी नेत्रियों ने दी सीधी चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए आदिवासी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती लोकेश्वरी नेताम और आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष उमेंन्दी कोर्राम ने छात्रों के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल भवन की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे स्वयं मैदान में उतरकर उग्र आंदोलन का नेतृत्व करेंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी!





