आधुनिक भारत के शिल्पकार डॉ बी आर अंबेडकर – अनीता मिर्झा

14 अप्रेल डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयंती विशेष लेख

मानवी सभ्यता के साथ साथ मनुष्य ने जीवन निर्वाह के लिए अनेक साधनों का सृजन किया जो निसंदेह मानवीय विकास के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ सभ्यता के विकास क्रम में प्रागैतिहासिक काल पाषाण काल और ताम्र युग आधुनिक युग के रूप में इतिहास के पन्नों में पढ़ते हैं एवं लिखते हैं इन्हीं मानवी मूल्य की स्थापना के लिए अनादि काल से मनुष्य ने कुछ ना कुछ प्रकार की व्यवस्था स्थापित की है इन्हीं रचनात्मक एवं सृजनात्मक लेखन सृजनात्मक गुण के कारण मनुष्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है आधुनिक काल सभ्यता की रक्षा के लिए मनुष्यों ने संविधान सरकार राज्य कानून जैसे संस्था का निर्माण किया है इन्हीं संस्थाओं के परिणाम स्वरूप आज मानवता की रक्षा करने में काफी हद तक हम सफल हुए हैं

समाज सभ्यता और समानता के लिए संविधान की आवश्यकता है

अंबेडकर द्वारा तैयार की गई संविधान के पाठ में व्यक्तिगत नागरिकों के लिए नागरिक स्वतंत्रता की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए संवैधानिक गारंटी एवं सुरक्षा प्रदान की गई है जिसमें धर्म की आजादी छुआछूत को खत्म करना और भेदभाव के सभी रूपों का उल्लंघन करना शामिल है अंबेडकर ने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए तर्क दिया है अंबेडकर एक बुद्धिमान संविधान विशेषज्ञ थे उन्होंने लगभग 60 देश के संविधानों का अध्ययन किया था अंबेडकर को भारत के संविधान का पिता कहा जाता है और उसके रूप में उनका मान्यता प्राप्त भी है संविधान सभा में मसौदा समिति के सदस्य टीटी कृष्णमाचारी ने कहा संविधान में स्पष्ट करता है कि राज्य किसी और उन्मुख होगी राज्य में संविधान एक प्राण वायु की तरह कार्य करता है इसी के आधार पर राज्य के निर्माण एवं अंत होता है

बाबा साहब की आत्मकथा

बाबासाहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को ब्रिटिश भारत के मध्य भारत प्रांत अब मध्य प्रदेश में जो स्थित है महु नगर के सैन्य छावनी में हुआ था वह रामजी मालोजी सतपाल और भीमाबाई की चौदहवी वह अंतिम संतान थे उनका परिवार कबीर पंथ को मानने वाला मूल मराठी के थे अप्रैल 1906 में जब भीमराव की लगभग 15 वर्ष के थे तो वह 9 साल की लड़की रमाबाई से उनकी शादी कराई गई थी तब हिंदू हिंदू समाज में बाल विवाह का प्रचलन था हिंदू पथ में व्याप्त कुर्तियों के और छुआछूत की प्रथा से तंग आकर सन 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म को अपना लिया था उनके जन्म शताब्दी वर्ष में बाबा साहब द्वारा किए गए महान कार्यों के लिए मरणोपरांत ने भारत रत्न से सम्मानित किया गया 14 अप्रैल 1990 को राष्ट्रपति श्री रामास्वामी वेंकटरमण ने बाबा साहब के विधवा श्रीमती सविता अंबेडकर को भारत रत्न का सर्वोच्च खिताब प्रदान किया लोगों की राय में इसमें भारत रत्न खुद गौरवान्वित हुआ कहते हैं हर सदी में हर युग में कुछ अपवाद होते हैं औरों से अलग होने की वजह से वह असाधारण होते हैं दलितों के मसीहा और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ बाबासाहेब आंबेडकर भी ऐसे ही हस्ती थे14 अप्रैल को उनका जन्म दिवस अंबेडकर जयंती के तौर पर भारत व समूचे दुनिया भर में मनाया जाता है, डॉ बाबासाहेब अंबेडकर की विरासत में लोकप्रिय संस्कृति में कई स्मारक और चित्रण शामिल है बाबा साहब ने कहा हालांकि में एक अछूत हिंदू के रूप में पैदा हुआ हूं लेकिन मैं एक हिंदू के रूप में हरगिज नहीं मरूंगा बाबासाहेब अंबेडकर ने कहा था उनके जीवन तीन गुरुओं और तीन उपवासियों से सफल बना है उन्होंने जिन तीन महान व्यक्तियों को अपना गुरु माना है उनमें से पहले गुरु थे तथागत गौतम बुध दूसरे थे संत कबीर तीसरे गुरु थे महात्मा ज्योतिबा फुले उनके तीन उपाय से देवता ज्ञान स्वाभिमान और शील अंबेडकरवाद बाबा साहब अंबेडकर की विचारधारा और दर्शन हैं स्वतंत्रता ,समानता, भाईचारा ,बौद्ध धर्म, विज्ञानवाद, मानवतावाद ,सत्य अहिंसा आदि के विषय में अंबेडकरवाद के सिद्धांत हैं अंत में उन्होंने कहा मैंने तुम्हारे लिए जो कुछ भी किया है वह बहुत मुसीबत अत्यंत दुखों और बेशुमार विरोधों का मुकाबला करके किया है यह कारवां आज जिस जगह पर है मैं इसे बड़ी मुसीबत के बाद लाया हूं अब तुम्हारा कर्तव्य है कि यह कारवां सदा आगे ही बढ़ता रहे बेशक कितनी ही रुकावटें क्यों ना आए यदि तुम मेरे अनुयाई हो इसे आगे ना बढ़ा सके तो इसे यहीं तक रहने दे पर किसी भी हालत में इसे पीछे ले जाने ना दें अपने लोगों को मेरा यही संदेश अथवा आदेश है पूज्य डॉक्टर भीमराव अंबेडकर साहब ने अपने आखिरी दिनों में नानक चंद रत्तू के माध्यम से अपने सभी अनुयायियों को यह संदेश दिया।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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