112 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने तिरंगा थामकर दिया शांति, भाईचारे और राष्ट्रप्रेम का संदेश
आत्मसमर्पित युवाओं के बीच पहुंचे एसपी मयंक गुर्जर, पुनर्वासित महिला अमीला पदामी ने किया ध्वजारोहण
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। कभी हाथों में बंदूक थामकर हिंसा के रास्ते पर चलने वाले हाथ जब स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा थामे नजर आए, तो सुकमा के पुनर्वास केंद्र में बदलाव, शांति और नई उम्मीद की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुनर्वास केंद्र में 112 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने तिरंगा हाथों में लेकर राष्ट्रप्रेम, भाईचारे और समाज की मुख्यधारा में लौटने का संदेश दिया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर पुनर्वास केंद्र पहुंचे और आत्मसमर्पित युवाओं के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पुनर्वासित महिला अमीला पदामी को ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया। एसपी के इस कदम ने पुनर्वासित युवाओं के बीच सम्मान, विश्वास और अपनत्व की भावना को और मजबूत किया।
अमीला पदामी के हाथों फहराया तिरंगा
एसपी श्री मयंक गुर्जर के आमंत्रण पर पुनर्वासित महिला अमीला पदामी ने जब राष्ट्रीय ध्वज फहराया, तो पूरा परिसर राष्ट्रगान की गूंज से भर उठा। ध्वजारोहण के बाद सभी पुनर्वासित युवाओं ने तिरंगे को सलाम किया। यह क्षण उनके जीवन में आए बदलाव और हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने की यात्रा का प्रतीक बन गया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि विश्वास, अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर हिंसा के रास्ते से लौटे युवा भी समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

पुनर्वास से मिल रही नई दिशा
स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन महज राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं रहा, बल्कि सुकमा में शांति और पुनर्निर्माण की बदलती तस्वीर का प्रतीक बन गया। शासन-प्रशासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से मुख्यधारा में लौट रहे युवाओं को सम्मानजनक जीवन के साथ अपने हुनर और क्षमताओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
तिरंगे की छांव में मनाया गया यह स्वतंत्रता दिवस उन युवाओं के लिए नई शुरुआत का संदेश लेकर आया, जिन्होंने अतीत की हिंसा को पीछे छोड़कर शांति, विकास और बेहतर भविष्य का रास्ता चुना है।
कार्यक्रम में श्री हरिशंकर साहू, क्रांति बघेल, सुमन मौर्य, भगत यादव, राजेश तिग्गा, किच्चे मुका, सोढ़ी भीमा सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
सुकमा के पुनर्वास केंद्र में लहराता तिरंगा इस बात का प्रतीक बना कि बंदूक से तिरंगे तक का सफर केवल एक व्यक्ति का बदलाव नहीं, बल्कि शांति और विश्वास के जरिए बदलते बस्तर की कहानी भी है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
राजधानी से जनता तक न्यूज वेबसाइट के आलावा दैनिक अखबार, यूटयूब चैनल के माध्यम से भी लोगो तक तमाम छोटी बड़ी खबरो निष्पक्ष रूप से सेवा पहुंचाती है





