आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल?
पौव्वा मांगने वालों को किया जा रहा परेशान, बाहर ऊंचे दामों पर बिक रही वही शराब
छुईखदान। छुईखदान की देशी और विदेशी शराब दुकानों में इन दिनों शराब बिक्री के नाम पर बड़ा खेल चलने के आरोप सामने आ रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम ग्राहकों को छोटी बोतल यानी पौव्वा तक उपलब्ध नहीं हो रहा, जबकि कथित कोचियों और अवैध कारोबारियों को पेटियों के हिसाब से शराब सप्लाई किए जाने की चर्चाएं खुलेआम हो रही हैं। इससे पूरे क्षेत्र में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब दुकानों में सुनियोजित तरीके से स्टॉक छिपाकर रखा जा रहा है। आम ग्राहक जैसे ही अपनी पसंद का ब्रांड या पौव्वा मांगते हैं, उन्हें “स्टॉक खत्म” का बहाना बनाकर लौटा दिया जाता है। लेकिन कुछ ही देर बाद वही शराब दुकान के बाहर और गांव-गांव में अधिक कीमत पर आसानी से बिकती दिखाई देती है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि शराब दुकानों से अवैध सप्लाई का समानांतर नेटवर्क संचालित हो रहा है।
मदिरा प्रेमियों का कहना है कि दुकान कर्मचारियों का व्यवहार भी लगातार विवादों में है। ग्राहकों को मजबूरन महंगी अध्धी या पूरी बोतल लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। विरोध करने पर बहस और अभद्रता तक की नौबत आ जाती है। लोगों का आरोप है कि यह सब केवल अधिक मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दुकानों में वास्तव में स्टॉक खत्म है, तो फिर वही शराब कोचियों और बाहरी लोगों के पास कैसे पहुंच रही है? आखिर किसकी अनुमति से शराब की पेटियां दुकान से बाहर जा रही हैं? क्या स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक बिक्री में भारी गड़बड़ी हो रही है?
लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर यह खेल संभव नहीं है। आबकारी विभाग की चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। आम लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई जांच या कार्रवाई नहीं होना पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।
क्षेत्र में चर्चा है कि शाम होते ही कई दुकानों से चुनिंदा लोगों को विशेष तरीके से शराब उपलब्ध कराई जाती है, जबकि आम ग्राहक लाइन में खड़े रहकर खाली हाथ लौट रहे हैं। इससे शासन को राजस्व हानि के साथ-साथ अवैध शराब कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
अब स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि छुईखदान की देशी और विदेशी शराब दुकानों का स्टॉक, सीसीटीवी फुटेज, बिक्री रजिस्टर और दैनिक सप्लाई रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषी कर्मचारियों, ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
:- जनता के सवाल, जिनका जवाब जरूरी है:-
आखिर आम ग्राहकों के लिए शराब का स्टॉक हमेशा खत्म क्यों रहता है?
कोचियों तक शराब की पेटियां कैसे पहुंच रही हैं?
क्या आबकारी विभाग सबकुछ जानते हुए भी मौन है?
क्या शराब दुकानों में अंदरखाने अवैध सप्लाई का संगठित खेल चल रहा है?
लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला जनआक्रोश के साथ बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।



