जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। जिले के दूरस्थ और कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे गोगुंडा क्षेत्र की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जो पहाड़ियां कभी भय और सन्नाटे के लिए जानी जाती थीं, आज वहीं रोजगार और उम्मीद की नई कहानी लिखी जा रही है। गोगुंडा और मिचिगुड़ा में पहली बार संगठित रूप से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य शुरू होने से ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है।
पहली बार खुले में तेंदूपत्ता फड़
कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन और डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के मार्गदर्शन में वन विभाग ने इस दुर्गम क्षेत्र में दो नए तेंदूपत्ता फड़—गोगुंडा फड़ और मिचिगुड़ा फड़—शुरू किए हैं। यह पहली बार है जब यहां के आदिवासी ग्रामीणों को वनोपज संग्रहण के लिए व्यवस्थित प्लेटफॉर्म और सरकारी सहयोग मिला है।
बढ़ेगी आय, मिलेगा रोजगार
वन विभाग के अनुसार इस सीजन में दोनों फड़ों से 200 से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित होने की संभावना है। इससे स्थानीय आदिवासी परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। वर्षों से अभाव झेल रहे ग्रामीणों के लिए यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है।
सुरक्षा और विकास का संगम
इस सकारात्मक बदलाव के पीछे सुरक्षा बलों की सतत मौजूदगी और बेहतर कानून व्यवस्था की बड़ी भूमिका रही है। पहले नक्सल प्रभाव के कारण यह क्षेत्र विकास योजनाओं से वंचित था, लेकिन अब प्रशासन, सुरक्षा बल और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से योजनाएं अंतिम छोर तक पहुंच रही हैं।
बदलती तस्वीर, बढ़ता भरोसा
तेंदूपत्ता संग्रहण की यह शुरुआत सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि विश्वास और विकास का प्रतीक बन चुकी है। जिन पहाड़ियों पर कभी डर का साया था, वहां आज मेहनतकश हाथों की गूंज और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद दिखाई दे रही है।
गोगुंडा और मिचिगुड़ा की यह पहल साबित कर रही है कि जब सुरक्षा, प्रशासन और जनभागीदारी साथ आएं, तो सबसे दुर्गम क्षेत्र भी आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकते हैं।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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