सुकमा में पुनर्वास की नई मिसाल: आत्मसमर्पित युवाओं को मिला राजमिस्त्री बनने का हुनर
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा। कभी नक्सल हिंसा की राह पर भटके युवाओं के जीवन में अब बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। सुकमा जिला प्रशासन और एसबीआई आरसेटी के संयुक्त प्रयास से आत्मसमर्पित नक्सलियों को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में पुनर्वास केंद्र में रह रहे 25 आत्मसमर्पित युवाओं—जिनमें 13 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं—को राजमिस्त्री का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे सम्मानजनक रोजगार के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी नई पहचान बना सकें।

बंदूक से औजार तक का सफर
एक समय जिन हाथों में बंदूकें थीं, आज उन्हीं हाथों में निर्माण के औजार हैं। यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में पुनर्स्थापना, आत्मविश्वास और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ये युवा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न निर्माण कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे और जिले के विकास में सहभागी बनेंगे।
सोड़ी हूंगी बोलीं – अब डर नहीं, आत्मनिर्भरता का सपना है

कोंटा क्षेत्र की अरलमपल्ली निवासी सोड़ी हूंगी ने बताया कि हिंसा का रास्ता छोड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रहने, खाने और प्रशिक्षण की बेहतर व्यवस्था की है। अब राजमिस्त्री का काम सीखकर वे अपने पैरों पर खड़ी होंगी और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सहयोग कर सकेंगी।
पदम रैनू की भावुक कहानी
जगरगुंडा के मंडीमरका निवासी पदम रैनू ने कहा कि जंगलों में जीवन बेहद कठिन और असुरक्षित था। आज सरकार की पुनर्वास नीति के कारण उन्हें सुरक्षित आवास, बेहतर सुविधाएं और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण मिला है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण उनके जीवन को नई दिशा दे रहा है और अब वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।
280 से अधिक आत्मसमर्पित युवाओं को मिला प्रशिक्षण
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि आत्मसमर्पण का वास्तविक उद्देश्य केवल हथियार छोड़ना नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। जिले में अब तक लगभग 280 आत्मसमर्पित युवाओं को राजमिस्त्री प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य इन युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है ताकि वे आत्मविश्वास के साथ नया जीवन शुरू कर सकें।
शांति और विकास की मजबूत नींव
सुकमा जिला प्रशासन की यह पहल बस्तर में बदलते हालात और विकास की नई सोच को दर्शाती है। कौशल विकास और पुनर्वास के माध्यम से न केवल युवाओं का भविष्य संवर रहा है, बल्कि जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी नई गति मिल रही है। यह प्रयास साबित करता है कि विश्वास, संवेदनशीलता और अवसर मिलने पर बदलाव संभव है, और यही बदलाव अब सुकमा में शांति और विकास की मजबूत नींव बन रहा है।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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