पित्त पक्ष का पंद्रह दिन होता है शुभ रामायण भागवत और पूजा कथा कराने से 

पित्त पक्ष का पंद्रह दिन होता है शुभ रामायण भागवत और पूजा कथा कराने से

 

 

 

 

मृत्यु जीवात्मा कि शांति के लिए किया जाता पित्त पाक्ष में शांति के लिए पूजा पाठ

 

 

 

 

संवाददाता लक्ष्मी रजक

 

 

 

 

 

खैरागढ़। खैरागढ़ पित्त पक्ष पंद्रह दिन बारह महीनों में आने वाले दिनों मे और पर्व में सबसे शुभ और अच्छा पर्व माना जाता है क्यूंकि पित्त पक्ष में पंद्रह दिन भगवान का द्वार खुला रहता है पित्त पक्ष में जिस भी व्यक्ति कि मृत्यु होती है वो सीधे भगवान के यहां जाता है उसकी आत्मा नहीं भतकता है और सीधे उसकी आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है पित्त पक्ष में सभी के यहां छत्तीसगढ़ कि संस्कृति और सभ्यता है और पहले से चला आ रहा है पित्त पक्ष में जिसके यहां पहले से कोई सदस्य कि मृत्यु हो जाती है उसके लिए पित्त पक्ष में आत्मा कि शांति के लिए और घर के कुल देवता के लिए पित्त पाक के पर्व में प्रातः काल में सुबह उठकर घर के दरवाजे के बाहर प्रातः काल में दरवाजे के बाहर लीफकर रंगोली बनाकर लोटे में पानी रखकर फूलपत्र रखकर दातून रखकर चाय रखकर खिर पुड़ी बनाकर चावल सब्जी का भोग लगाया जाता है उड़द का दाल का बडा बनाया जाता है और कहा जाता है पित्त पक्ष में इतना सबकुछ कराने से मृत्यु हुई लोगों कि आत्मा कि शांति होती है

 

 

 

पित्त पक्ष में शांति के लिए कराते हैं पूजा पाठ हमारे देश मे तीर्थस्थल

 

पित्त पक्ष में शांति के लिए तीर्थस्थल में पित्त पक्ष में पितर दोष के लिए और जीवात्मा जीव कि शांति के लिए उज्जैन, हरिद्वार,नासिक जैसे तीर्थस्थल में जाकर पितर दोष कि शांति के लिए और जीवात्मा व्यक्ति कि आत्मा कि शांति के लिए घर के सभी घर के पूर्वज का नाम लेकर तीर्थस्थल में पूजा अर्चना किया जाता है

 

 

 

जीवात्मा आत्मा कि शांति के लिए रामायण भागवत पूजा अर्चना कराना होता है शुभ

 

पित्त पक्ष में कहा जाता है पितर दोष कि शांति के लिए मृत्यु व्यक्ति के लिए रामायण भागवत पूजा कथा कराने से बहुत ज्यादा शुभ होता है कहा जाता है जिसकी भी मृत्यु हुई रहती है और पित्त पक्ष में जिसकी मृत्यु होती है उसके लिए भगवान का द्वार खुला होता है और जिसकी भी आत्मा भतकती है पित्त पक्ष में उसकी आत्मा कि शांति के लिए रामायण और भागवत कथा पूजा कराने से उसकी आत्मा को शांति मिल जाती है पितर पक्ष का पंद्रह दिन भगवान का द्वार खुला रहता है और शुभ माना जाता है ।

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