
गरियाबंद/मैनपुर: बुढ़ापे का बैंकॉक टूर बुढ़ापे में लाठी का सहारा तो सिर्फ नाम का है, असली सहारा तो पेंशन की वह पर्ची है जो हर महीने बैंक के दरवाजे पर दम तोड़ देती है। सरकार ने बुजुर्गों के लिए ‘पेंशन’ नाम की एक ऐसी लॉटरी निकाली है, जिसमें हर बुजुर्ग हिस्सा लेता है, लेकिन जैकपॉट कभी किसी का नहीं लगता।सोचिए, जवानी में जिस इंसान ने टैक्स भर-भर कर देश का बजट संभाला, बुढ़ापे में उसे अपनी ही पेंशन पाने के लिए कभी 9 किमी पैदल तो कभी बहुओं की पीठ पर बैठकर बैंक जाना पड़ता है। लगता है सरकार बुजुर्गों को तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि पेंशन के बहाने ‘बैंकॉक (बैंक) टूर’ का एडवेंचर करवा रही है, जहाँ हर महीने नई रुकावटों का रोमांच होता है!
फिंगरप्रिंट की महाभारत
सरकारी दफ्तरों में नियम ऐसे-ऐसे हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि बुजुर्गों की पेंशन नहीं, बल्कि कोई परमाणु कोड पास किया जा रहा है। कभी बुजुर्गों के अंगूठे के निशान (फिंगरप्रिंट) समय की रेत में मिट जाते हैं, तो कभी सिस्टम के आगे बेबस हो जाते हैं।बेचारे बुजुर्ग जिंदा होने का प्रमाण देने के लिए बैंकों के चक्कर काट-काटकर अपनी बाकी बची उम्र भी वहीं गुजार देते हैं। बैंक वाले कहते हैं “जनपद से नहीं आई”, जनपद वाले कहते हैं “पोर्टल पर अटकी है”। इस लुका-छिपी के खेल में बुजुर्गों की पेंशन, भगवान भरोसे ही चलती है। शायद सिस्टम चाहता है कि बुजुर्ग पैसों के बजाय सिर्फ दुआओं से ही अपना पेट भरें!
जीवित होने का श्राप सबसे बड़ा मजाक तो ‘जीवन प्रमाण पत्र’ (Life Certificate) के नाम पर होता है। नियम ऐसा कि जिंदा होने का सबूत हर साल देना पड़ेगा, जैसे कि बुढ़ापा कोई बीमारी हो जो रातों-रात गायब हो जाए। और अगर पेंशन आ भी गई, तो वह इतनी होती है कि उससे सिर्फ कुछ किलो आटा और चाय ही नसीब हो सकती है, घी तो दूर की बात है।तंज तो इस बात पर है कि महंगाई के इस दौर में उस पेंशन का बजट इतना कम होता है, जिसे देखकर कोई भी बुजुर्ग हँसे या रोए, समझ नहीं पाता। नेताजी भाषणों में भले ही कहें कि “बुजुर्ग हमारे देश की शान हैं”, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बुढ़ापे में पेंशन का इंतजार करना, किसी महाभारत से कम नहीं!सिस्टम की इस लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाती कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं, जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
जानकारी लेने पर समाज कल्याण विभाग गरियाबंद के उपसंचालक डी पी ठाकुर ने पिछले दिनो बताया पूरे गरियाबंद जिले में वृद्धा पेंशन योजना के कुल हितग्राही 24 हजार 507, विधवा पेंशन योजना के 9034 एवं दिव्यांग पेंशन योजना के 870 को मिलाकर कुल 34 हजार 411 हितग्राहियो को जनवरी 2026 पांच माह का पेंशन राशि नही मिल पाया है। उन्होने बताया आगे से आबंटन ही नही आया है जबकि पूरी जानकारी भेजी जा चुकी है।
60 वर्ष के ऊपर के हितग्राहियो को 500 रूपये प्रतिमाह एवं 80 वर्ष के ऊपर हितग्राहियो को 650 रूपये मिलता है
इंदिरा गांधी वृद्धा पेंशन योजना के तहत 60 वर्ष से ऊपर के हितग्राही को प्रतिमाह 500 रूपये एवं 80 वर्ष के ऊपर हितग्राही को 650 रूपये, विधवा पेंशन 500 रूपये एवं दिव्यांग पेंशन 500 रूपये दिया जाता है जो अभी तक हितग्राहियो को नही मिल पाया है। वही दूसरी ओर राज्य स्तर का पेंशन समाजिक, सुखद, मुख्यमंत्री पेंशन योजना की राशि हर माह मिल रहा है। लेकिन पांच माह का पेंशन नही मिलने से हितग्राही बुजुर्ग बेहद परेशान हो गये है। बुजुर्गो को पांच माह से वृद्धा पेंशन न मिलना एक गंभीर समस्या है जिससे उन्हे आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है कई वृद्धो को जिन्हे परिवार के सदस्यो का सहारा नही मिल रहा है वे दर दर की ठोकरे खा रहे है। शासन एक ओर पेंशन राशि के माध्यम से वृद्धो को सहायता देने का दावा तो कर रही है लेकिन वास्तविक स्थिति कुछ और ही दिख रही है हजारो हितग्राहियो को पेंशन नही मिला है। 80 वर्षीय रामेश्वर, राधिका बाई, डुमरबाई, रामबती ने बताया पांच माह से पेंशन के लिए चक्कर लगा रहे है लेकिन पेंशन नही मिलने से भारी परेशानी हो रही है। उन्होने बताया पहले आसानी से पेंशन मिलता था अब परेशानी हो रही है वृद्धा पेंशन नही मिलने से जीविकापार्जन करने में भारी परेशानी हो रही है लगातार हर माह पंचायत और जनपद का चक्कर लगा रहे है अब मिलेगा तब मिलेगा कहा जा रहा है लेकिन नही मिल पा रही है वही दूसरी ओर दिव्यांग पेंशन वाले भी अपना परेशानी बताते हुए पेंशन जल्द भुगतान करने की मांग किया है।
क्या कहते है अधिकारी
पंचायत इस्पेक्टर राजकुमार ध्रुवा ने बताया कि आगे से ही पेंशन नही आई है पूरी जानकारी जिला स्तर में भेजा जा चुका है। उन्होने बताया जनपद तक ग्रामीण पेंशन की राशि की मांग करने आ रहे है। राजकुमार ध्रुवा से मिली जानकारी के अनुसार मैनपुर विकासखण्ड में वृद्ध पेंशन 7 हजार 822, विधवा पेंशन 2300 एवं दिव्यांग पेंशन 375 हितग्राहियो को वितरण किया जाता है।




