बदलते बस्तर की नई तस्वीर: बंदूक के साए से सुशासन की छांव तक
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
राजधानी से जनता तक/सुकमा। बस्तर के घने जंगलों और कभी नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में अब बदलाव की बयार साफ महसूस की जा रही है। जिन गांवों तक कभी प्रशासन की पहुंच मुश्किल मानी जाती थी, वहां अब सुशासन खुद मोटरसाइकिल पर सवार होकर पहुंच रहा है। सुकमा जिले में शुक्रवार को एक ऐसा ही ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर दुर्गम रास्तों को पार करते हुए कोंटा विकासखंड के पहुंचविहीन गांवों भेज्जी, मैलासुर, दंतेषपुरम, बुर्कलंका, गछनपल्ली, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा पहुंचे।

उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों पर बाइक से सफर कर अधिकारियों का गांव पहुंचना ग्रामीणों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं था। आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर को अपने बीच देखकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे। यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि विश्वास और विकास का संदेश बन गया।
चौपाल में बैठे अफसर, सुनी ग्रामीणों की बात
दौरे के दौरान अधिकारियों ने बुर्कलंका में बन रहे ‘सुशासन परिसर’ का निरीक्षण किया। जंगलों के बीच तैयार हो रहा यह परिसर प्रशासनिक नवाचार का उदाहरण बन रहा है, जहां एक ही परिसर में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस सेंटर और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मैलासुर पंचायत में आयोजित सुशासन शिविर के दौरान कलेक्टर और सीईओ जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे रूबरू हुए। सरपंच, पटेल और ग्रामीणों से योजनाओं की जमीनी स्थिति जानी गई और निर्माण कार्यों को समयसीमा में पूरा करने का भरोसा दिया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा को मिली प्राथमिकता
दौरे में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़ी घोषणाएं की गईं। भेज्जी पंचायत में नए उप स्वास्थ्य केंद्र को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई, जबकि मैलासुर में स्वास्थ्य केंद्र के लिए तत्काल भूमि चिन्हांकन के निर्देश दिए गए। गछनपल्ली में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए स्टाफ क्वार्टर स्वीकृत किया गया, ताकि ग्रामीणों को 24 घंटे चिकित्सा सुविधा मिल सके।
शिक्षा के क्षेत्र में दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश से पहले हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अंदरूनी इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
पेयजल, खेती और आजीविका को मिला नया सहारा
ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मैलासुर और दंतेषपुरम में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए तालाबों का चिन्हांकन किया गया और मछली बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
दंतेषपुरम में डैम और तालाब निर्माण की मंजूरी के साथ पेयजल के लिए पानी टंकी निर्माण का आदेश भी दिया गया। वहीं मैलासुर और बोदराजपदर में नए हैंडपंप और बोरिंग की तत्काल स्वीकृति प्रदान की गई।
कलेक्टर ने पीएचई विभाग को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जहां जल जीवन मिशन के कार्य पूरे हो चुके हैं, वहां तत्काल जलापूर्ति शुरू की जाए और शेष गांवों में तेजी से कार्य पूर्ण कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
सड़क और पुल-पुलिया से जुड़ेगा विकास
इन दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़कों और पुल-पुलियों के निर्माण पर भी जोर दिया गया। कलेक्टर ने पीएमजीएसवाई विभाग को बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य मार्गों से जोड़ने हेतु तत्काल प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों का यह दौरा इस बात का प्रतीक बन गया कि अब बस्तर की पहचान सिर्फ नक्सलवाद नहीं, बल्कि सुशासन, विकास और विश्वास से हो रही है।
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि अंतिम छोर तक बसे गांवों में विकास पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयसीमा में पूरा किया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे अधिकारी
इस दौरान एसडीएम कोंट सुभाष शुक्ला, जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, एडिशनल एसपी श्री मनोज तिर्की, पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता रविंद्र ताती, महिला एवं बाल विकास अधिकारी रितिश टंडन, बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
Author: ISHWAR NAURANGE
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