वर्षों पुराने कथित कब्जों पर चुप्पी, अचानक बढ़ी प्रशासनिक सख्ती से जनता पूछ रही जवाब।
मोहन प्रताप सिंह
राजधानी से जनता तक, सूरजपुर/भटगांव:– नगर पंचायत भटगांव में इन दिनों अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। नगर पंचायत, एसईसीएल प्रबंधन, राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और सुरक्षा विभाग की सक्रियता के बीच नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आम जनता के बीच कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या कानून की कसौटी पर सभी बराबर हैं या कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रह जाएगी?

जनता का सवाल, वर्षों से जमे कब्जों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अतिक्रमण वास्तव में प्रशासन की प्राथमिक चिंता है, तो नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों से बने कथित अवैध कब्जों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई। लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर प्रशासन सख्त नजर आ रहा है, जबकि कई ऐसे इलाके हैं जहां लंबे समय से कथित अतिक्रमण बने हुए हैं और जिम्मेदार विभागों की नजर अब तक वहां नहीं पहुंची।
कोऑपरेटिव से बाजार पारा तक, कई स्थानों पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार कोऑपरेटिव दुकान परिसर, न्यू माइंस क्वार्टर, पुराना माइंस क्वार्टर, बाजार पारा क्षेत्र और मुख्य सड़कों के किनारे वर्षों से कथित रूप से अवैध कब्जे मौजूद हैं। लोगों का कहना है कि यदि अभियान निष्पक्ष है तो इन सभी स्थानों की भी समान रूप से जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।

एसईसीएल आवासों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म
नगर में सबसे अधिक चर्चा एसईसीएल के उन आवासों को लेकर हो रही है, जिनके संबंध में स्थानीय नागरिक दावा कर रहे हैं कि कुछ ऐसे लोगों का कब्जा है जिनका कंपनी से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने कथित मिलीभगत के आधार पर एसईसीएल के आवासों पर कब्जा कर उन्हें किराये पर दे रखा है और आर्थिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जाएगा।
गौरव पथ परियोजना पर भी पड़ा अतिक्रमण का असर
बाजार पारा की मुख्य सड़क के दोनों ओर हुए अतिक्रमण को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन्हीं अतिक्रमणों के कारण पूर्व में स्वीकृत गौरव पथ परियोजना अपने निर्धारित स्वरूप में पूरी नहीं हो सकी। उनका मानना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई की गई होती तो नगर की यातायात व्यवस्था बेहतर होती और सौंदर्यीकरण की योजना भी सफल हो सकती थी।
अतिक्रमण से आगे बढ़कर बुनियादी सुविधाओं पर भी उठे सवाल
नगर की जनता केवल अतिक्रमण को ही मुद्दा नहीं मान रही है। लोगों का कहना है कि कई वार्डों में कचरे के ढेर लगे हुए हैं और नियमित साफ-सफाई की प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती। वहीं पेयजल की समस्या से भी लोग परेशान हैं। ऐसे में विकास और सुशासन के दावों के बीच आम नागरिक यह जानना चाहता है कि मूलभूत सुविधाओं का लाभ उन्हें आखिर कब मिलेगा।
निष्पक्षता साबित करनी है तो सार्वजनिक हो पूरी सूची
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पूरे नगर पंचायत क्षेत्र और एसईसीएल परिसरों का व्यापक सर्वे कराया जाए तथा सभी कथित अवैध कब्जाधारियों की सूची सार्वजनिक की जाए। लोगों का सवाल है कि यदि कानून सबके लिए समान है तो प्रभावशाली लोगों और कथित संरक्षण प्राप्त कब्जाधारियों पर प्रशासनिक सख्ती क्यों दिखाई नहीं देती?
जिम्मेदारों की भूमिका पर भी उठने लगे प्रश्न
यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि वर्षों से जमे कथित अतिक्रमणों की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं थी। यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं थी तो यह प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
इन तमाम सवालों ने प्रशासनिक निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया है।
आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव
हालांकि, अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दिए जाने अथवा किसी प्रकार के लाभ पहुंचाने संबंधी आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाई जा रही आशंकाएं और शिकायतें हैं। इनकी पुष्टि केवल संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक करें, ताकि जनता के बीच व्याप्त भ्रम और अविश्वास समाप्त हो सके।
जनता की दो टूक मांग, कार्रवाई हो तो सब पर हो
अब भटगांव की जनता स्पष्ट जवाब चाहती है। यदि अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, तो वह पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के दिखाई देना चाहिए। कार्रवाई हो तो सब पर हो, नियम लागू हों तो सबके लिए हों और किसी व्यक्ति, पद, पहचान या प्रभाव के आधार पर विशेष छूट न मिले।
क्योंकि कानून की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है, जब न्याय केवल किया ही नहीं जाता बल्कि निष्पक्ष रूप से होता हुआ दिखाई भी देता है। अन्यथा जनता के मन में यह सवाल और गहराता जाएगा कि कहीं यह अभियान व्यवस्था सुधारने के बजाय केवल दिखावे और चुनिंदा कार्रवाई तक सीमित तो नहीं है।
भटगांव में अतिक्रमण विरोधी अभियान अब प्रशासन की निष्पक्षता की परीक्षा बन चुका है। जनता की अपेक्षा केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि समान कानून, पारदर्शिता और बिना भेदभाव के न्यायपूर्ण व्यवस्था की है।




