हाथ करघे से कमाई तक- ग्राम नारी की महिलाओं की सफलता का राज

रायपुर, 27 अप्रैल 2026/ ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ने अपने सामूहिक प्रयास, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर ऐसी सफलता की कहानी रची है, जो न केवल आर्थिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाएँ यदि अवसर और सहयोग प्राप्त करें, तो वे किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर सकती हैं। धमतरी जिले के छोटे से ग्राम नारी में आज आत्मनिर्भरता, परंपरा और नवाचार का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है। कभी सीमित संसाधनों और अवसरों वाला यह गाँव अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।

परंपरा से जुड़ी नई शुरुआत

नारी गाँव में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी, लेकिन पड़ोसी राज्य ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस क्षेत्र में कदम रखा। संबलपुरी साड़ियाँ अपनी विशेष इकत डिज़ाइन और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाती हैं, जिन्हें बनाने के लिए उच्च कौशल और धैर्य की आवश्यकता होती है।

सरकार का मजबूत सहयोग

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समिति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम अंतर्गत नियमित रूप से धागा प्रदाय किया जा रहा है, जिससे बुनकरों को नियमित रोजगार तथा समितियों को सुचारु संचालन हेतु सेवा प्रभार के रूप मे आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही नवीन बुनाई प्रशिक्षण तथा बुनकरों को नवीन करघे वितरण से उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इस सहयोग से समिति आर्थिक रूप से सशक्त हुई है तथा बाजार मांग के अनुरूप वस्त्र तैयार करने मे सक्षम हुई है।

बढ़ता बाजार और आय

आज ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्राम नारी द्वारा तैयार की गई साड़ियों की बिक्री मुख्य रूप से ओडिशा के बाजारों में होती है। वर्तमान मे समिति द्वारा माह मे 300-400 साड़ियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे समिति का मासिक कारोबार लगभग 3 से 4 लाख रुपये तक पहुँच चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।

महिलाओं का सशक्तिकरण

इस पहल ने न केवल आय के स्रोत को बढ़ाया है बल्कि, महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता दी है तथा सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता विकसित की है। जो महिलाएँ पहले इस कार्य से अनभिज्ञ थीं, वे आज कुशल बुनकर बन चुकी हैं और आत्मविश्वास के साथ उत्पादन में योगदान दे रही हैं। पूर्व मे शासकीय वस्त्र उत्पादन से जो महिलाएं प्रतिदिन 300-350 रुपये कमाती थी, वे आज 550-600 रुपये काम रही है। भविष्य मे अतिरिक्त कौशल उन्नयन प्रशिक्षण तथा दक्षता से वे 1000-1200 रुपये प्रतिदिन कमाने मे सक्षम हो सकेंगी।

भविष्य की दिशा

ग्राम नारी की यह सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से बढ़ रही है। यदि इसे आगे ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुँच का समर्थन मिले, तो यह और भी बड़े स्तर पर अपनी पहचान बना सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि जब सरकारी सहयोग और समुदाय की मेहनत साथ आती है, तो छोटे गाँव भी सफलता की बड़ी मिसाल बन सकते हैं।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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