

तिल्दा जनपद कार्यालय की बाउंड्री पर प्रतिबंधित कोनोकार्पस के पौधे! पर्यावरण विभाग के आदेश की अनदेखी?
छत्तीसगढ़ के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने कोनोकार्पस के नए पौधारोपण पर लगाई है रोक, फिर भी सरकारी परिसर में कथित रूप से लगाए गए पौधे; पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर खतरे को लेकर उठे सवाल
तिल्दा।छत्तीसगढ़ शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य के हित में कोनोकार्पस (Conocarpus) प्रजाति के नए पौधों के रोपण पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद तिल्दा जनपद पंचायत कार्यालय की बाउंड्री के किनारे कथित रूप से इसी प्रजाति के पौधे लगाए जाने का मामला सामने आया है। इससे शासन के आदेशों के पालन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि बाउंड्री के किनारे लगाए गए पौधे कोनोकार्पस प्रजाति के हैं। यदि जांच में यह पुष्टि होती है, तो यह न केवल शासन के निर्देशों की अवहेलना होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को भी प्रभावित करने वाला मामला माना जाएगा।
राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में तैयार विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस विदेशी एवं आक्रामक (इनवेसिव) प्रजाति के नए पौधारोपण पर रोक लगाई है। आदेश के अनुसार अब कोई भी शासकीय विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, स्वायत्त संस्था अथवा अन्य एजेंसी राज्य में कोनोकार्पस के नए पौधे नहीं लगा सकती।
कोनोकार्पस से होने वाली संभावित हानियां
विशेषज्ञों के अनुसार इस पौधे से कई प्रकार की पर्यावरणीय एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं—
यह एक विदेशी एवं आक्रामक प्रजाति है, जो स्थानीय देशी पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर जैव विविधता को नुकसान पहुंचा सकती है।
इसकी तेजी से फैलने वाली जड़ें भूमिगत पाइपलाइन, नालियों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने की आशंका पैदा करती हैं।
इसके परागकण (Pollen) संवेदनशील लोगों में एलर्जी, सर्दी, खांसी, अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
यह स्थानीय पक्षियों, मधुमक्खियों और अन्य जीवों के लिए अपेक्षाकृत कम उपयोगी माना जाता है, जिससे प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों ने इसके भूजल संसाधनों और स्थानीय पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब राज्य सरकार स्वयं इस प्रजाति के नए पौधारोपण पर रोक लगा चुकी है, तब तिल्दा जनपद पंचायत कार्यालय की बाउंड्री के किनारे इन पौधों का रोपण किसके निर्देश पर किया गया? क्या संबंधित अधिकारियों को शासन के आदेश की जानकारी नहीं थी, या फिर आदेशों की अनदेखी की गई?
अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन, वन विभाग एवं संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर पौधों की प्रजाति की वैज्ञानिक पुष्टि करें। यदि जांच में ये पौधे प्रतिबंधित कोनोकार्पस प्रजाति के पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए इनके स्थान पर स्थानीय एवं पर्यावरण के अनुकूल देशी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएं।
(नोट: यह समाचार स्थल पर किए गए प्रत्यक्ष अवलोकन एवं उपलब्ध तस्वीरों के आधार पर तैयार किया गया है। पौधों की अंतिम प्रजाति की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही होगी।






