पीएम के 100 दिन में 1320 मेगावाट प्लांट, सितंबर में कार्यादेश होगा जारी

 एनटीपीसी को नियुक्त किया गया है सलाहकार, बीएचईएल करेगा निर्माण

1320 मेगावाट प्लांट के लिए हटाना पड़ेगा बेजा कब्जा में बने 225 मकान

कोरबा । छत्तीसगढ़ पावर जेनरेशन कंपनी (सीएसपीजीसीएल) की कोरबा पश्चिम में प्रस्तावित 1320 मेगावाट थर्मल पावर सुपरक्रिटिकल प्लांट को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 100 दिन के एजेंडे में शामिल कर लिया गया है। सितंबर माह में निर्माण कार्य का कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। पर्यावरण सुनवाई हो चुकी है, जल्द ही इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) को निर्माण के लिए सलाहकार कंपनी नियुक्त किया गया है। भारतीय तकनीक से इस संयंत्र का निर्माण भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) करेगी।भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए कोरबा में 660 मेगावाट के दो नए संयंत्र की स्थापना की जाएगी। 13 हजार करोड़ की लागत से तैयार होने वाला यह 1320 मेगावाट का सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर स्टेशन प्रदेश का सबसे बड़ा और आधुनिक संयंत्र होगा। प्रति मेगावाट 9.50 करोड़ रूपये खर्च करना होगा। कोरबा पश्चिम में पहले ही 210 मेगावाट क्षमता की चार तथा 500 मेगावाट क्षमता एक इकाई संचालित है। इस परिसर में सीएसपीजीसीएल की करीब 200 एकड़ की रिक्त भूमि उपलब्ध है। साथ ही खाद कारखाना के लिए पूर्व में आबंटित किए गए करीब 300 एकड़ जमीन को भी सीएसपीजीसीएल को हस्तांतरित किया जाना है। जमीन के कुछ हिस्से में कब्जा कर लिया गया है। इसे हटाने करीब 225 लोगों को नोटिस जारी करने की तैयारी प्रशासन ने कर ली है। इस संयंत्र के स्थापना से एक ओर हम बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर होंगे दूसरी ओर नए रोजगार सृजित होंगे। महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यहां कम लागत में बिजली उत्पादन होगा, क्योंकि साऊथ ईस्टर्न कोलफिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा कोयला खदान व एचटीपीपी संयंत्र तक कंवेयर बेल्ट सिस्टम लगा हुआ है, जिसके माध्यम से 24 घंटे कोयले की आपूर्ति नए संयंत्र के लिए भी होगी। इससे कोयला परिवहन में होने वाला खर्च बचेगा।राज्य में इस वर्ष गर्मी के सीजन में सर्वाधिक 6200 मेगावाट तक बिजली की मांग रही। बीते वर्ष के मुकाबले यह 200 मेगावाट अधिक है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 2978.7 मेगावाट है। राज्य स्थापना के समय उत्पादन क्षमता 1360 मेगावाट थी। प्रदेश में हो रहे आर्थिक विकास से बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने बीसवीं इलेक्ट्रिक पावर सर्वे के अनुमान के अनुसार आने वाले वर्ष 2029-30 तक राज्य में 8800 मेगावाट बिजली की खपत पहुंच जाएगी।राज्य में प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत की दर से बिजली की जरूरतों में वृद्धि हो रही है। प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में राज्य दूसरे नंबर पर है।००००(कोरबा) प्रीलिटिगेशन प्रकरण में राजीनामा कराये जाने के छूट संबंधी जानकारी सभी पक्षकारों को दिया जावें: अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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