भोंगापाल में बुद्ध जयंती, शिक्षाओं को बताया आज भी प्रासंगिक

भोंगापाल/नारायणपुर। विश्व को अहिंसा, करुणा और शांति का संदेश देने वाले गौतम बुद्ध की 2588वीं जयंती बस्तर संभाग के प्रमुख बौद्ध स्थल भोंगापाल (जिला कोंडागांव) में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। छठी शताब्दी में निर्मित बुद्ध चैत्यगृह में स्थित भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर नारायणपुर वीरेंद्र बहादुर पंचभाई और छत्तीसगढ़ बौद्ध समाज के प्रदेश अध्यक्ष अनिल खोबरागड़े ने बुद्ध प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने त्रिशरण और पंचशील का पाठ कर बुद्ध वंदना की।

मुख्य अतिथि पंचभाई ने कहा कि बौद्ध धर्म, बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित अनुकरणीय जीवन पद्धति है, जिसका उद्देश्य दुखों से मुक्ति और निर्वाण की प्राप्ति है। उन्होंने बताया कि प्रज्ञा, शील, करुणा, अहिंसा, मध्यम मार्ग, चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग जैसे सिद्धांत आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।

प्रदेश अध्यक्ष अनिल खोबरागड़े ने कहा कि संघर्ष और अशांति से जूझती दुनिया में बुद्ध का अहिंसा और करुणा का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने अंधविश्वास के स्थान पर तर्क, आत्म अनुभव और नैतिक आचरण पर बल दिया तथा सामाजिक समानता का मार्ग दिखाया।

कार्यक्रम में सर्व पिछड़ा वर्ग समाज के अध्यक्ष गुलाब बघेल, समाजसेवी अशोक चौधरी, जयंत वासनीकर, सरपंच रामसाय नाग, फूलसिंह कोर्राम, दिनेश सोरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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