एक पहल, एक बदलाव: प्रशासन ने बचाया किशोरी का बचपन और भविष्य

प्रशासनिक सक्रियता से रुका 14 वर्षीय बालिका का बाल विवाह, शिक्षा और सपनों को मिली नई उड़ान

 

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

 

सुकमा। जिले के दूरस्थ ग्राम कडयुपारा (मांडुपारा) सिरसेट्टी में प्रशासन की समय पर की गई संवेदनशील पहल ने एक 14 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाकर उसके सुरक्षित भविष्य की राह प्रशस्त कर दी। यह कार्रवाई न केवल एक बाल विवाह को रोकने तक सीमित रही, बल्कि एक किशोरी के अधिकारों, शिक्षा और सपनों की रक्षा का प्रेरणादायक उदाहरण बन गई।

 

जानकारी के अनुसार ग्राम में 15 जून को एक नाबालिग बालिका का विवाह आयोजित किया जाना था। बाल विवाह की सूचना मिलते ही कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल गांव पहुंची। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय परंपरा और सामाजिक रीति-रिवाजों के तहत बालिका का विवाह तय किया गया था तथा इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं।

 

संयुक्त टीम ने बालिका, उसके माता-पिता और ग्राम समुदाय के लोगों से संवाद स्थापित कर बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों के साथ-साथ कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों की संवेदनशील समझाइश और लगातार प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया। परिवार ने बालिका के हित को सर्वोपरि मानते हुए विवाह स्थगित करने की सहमति दी।

 

सबसे प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि स्वयं बालिका ने भी अपनी पढ़ाई जारी रखने और बेहतर भविष्य बनाने की इच्छा व्यक्त करते हुए प्रशासन के निर्णय का समर्थन किया। इसके बाद प्रशासन द्वारा घोषणा पत्र एवं पंचनामा तैयार कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूर्ण की गई।

 

बचपन बचाने की मिसाल

 

इस पहल ने यह साबित कर दिया कि समय पर किया गया प्रशासनिक हस्तक्षेप किसी बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकता है। प्रशासन, चाइल्ड लाइन, पुलिस विभाग और ग्राम पंचायत के समन्वित प्रयासों ने समाज को यह संदेश दिया कि परंपराओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन बच्चों के अधिकार, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

 

समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक किशोरी को कम उम्र में विवाह के बंधन में बंधने से बचाया गया और उसे अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिला। यह पहल जिले में बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

 

इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) मनीषा शर्मा, संरक्षण अधिकारी (संस्थागत देखरेख) रविन्द्र घृतलहरे, सेक्टर सुपरवाइजर रश्मि चन्द्रवंशी, सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो, चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर मनोज एक्का, आउटरिच वर्कर अंजलि वेट्टी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता देवे मिश्रा, पुलिस विभाग से सुमित तिर्की एवं सामनाथ नाग, ग्राम सरपंच बुधरा पोडियामी तथा ग्राम सचिव जुबराज सरकार सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।यह खबर पोर्टल पर “बचपन बचाने वाली प्रशासनिक पहल” के रूप में प्रमुखता से प्रकाशित की जा सकती है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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