वैकल्पिक शिक्षक के भरोसे भविष्य – दाबरीभाठा स्कूल जर्जर बच्चे पेड़ के नीचे तो कभी आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने को मजबूर शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल 

राजधानी से जनता तक/चरण सिंह क्षेत्रपाल 

देवभोग- गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्र ग्राम पंचायत सुकलीभाठा नवीन के आश्रित ग्राम दाबरीभाठा का शासकीय प्राथमिक शाला भवन अति जर्जर हालत में पहुंच चुका है, भवन की दीवारें और छतें की पपड़ी और पानी भी टपक रही हैं। जिससे बच्चों को सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को कभी पेड़ के नीचे तो कभी आंगनबाड़ी केंद्र में कक्षाएं संचालित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन का निर्माण लगभग 17-19 साल वर्ष पहले हुआ था, लेकिन घटिया निर्माण के कारण दीवारों की पपड़ी झड़ रही है, और छत से पानी टपकता है, बरसात के दिनों में पूरा कमरा पानी से भर जाता है। जिससे बच्चे स्कूल भवन के अंदर बैठ नहीं पाते।

एक ही कमरे में चल रही आंगनबाड़ी और स्कूल

ग्राम पंचायत सुकलीभाठा नवीन सरपंच हरलाल मांझी ने कहा कि बच्चों को सिर्फ एक ही कमरे आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ाया जाता है, सुबह 9.20 बजे से 3.00 बजे तक आंगनबाड़ी बच्चे को पढ़ाई जाती है,और 10.20 बजे से 4.00 बजे तक स्कूली बच्चों को कक्षा संचालित किया जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई लिखाई कराने में बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। आंगनबाड़ी और स्कूल बच्चे को एक साथ बैठाकर कर शिक्षा अध्ययन करवाया जाता है, जिसमें तीसरी, चौथी व पांचवीं कक्षा के बच्चों को पाठ्य पुस्तकों का अध्यापन कार्य नहीं हो पा रहा है। यदि इस तरह से शिक्षा की स्थिति कमजोर बनी रहती है, तो वनांचल क्षेत्र के बच्चें शिक्षा क्षेत्र में परिपक्व कैसे हो सकेंगे । जिससे वह आगे बढ़ कर अपने उज्ज्वल भविष्य को संवारने में कामयाब होंगे। इस तरह की शिक्षा व्यवस्था से नौनिहालों को जिंदगी गढ़ने में असफल होंगे।

वैकल्पिक ( शिक्षक)व्यवस्था पर संचालित शासकीय प्राथमिक शाला दाबरीभाठा

ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं है, संकुल स्त्रोत केन्द्र प्रभारी द्वारा पारिश्रमिक के आधार पर एक शिक्षित बेरोजगार युवा को वैकल्पिक शिक्षक व्यवस्था किया गया है।वह पहली से पांचवीं कक्षा के सभी बच्चों को एक साथ कैसे पढ़ाता है ? शिक्षा विभाग के नियमावली में पहली से पांचवीं कक्षा में दो या तीन दर्ज संख्या के आधार पर ही शिक्षक व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है। इन वनांचल क्षेत्र में स्थायी शिक्षक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं?कि स्कूल में शिक्षक व्यवस्था की जा रही है, लेकिन स्थायी रूप से आज दिन पर्यन्त तक कोई भी शिक्षक स्कूल में पदस्थ रहे हैं , लेकिन बच्चों को सुव्यवस्थित ढंग से न पढ़ाया-लिखाया है ,और न ही स्थायी पदस्थ रहे। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर हालत को लेकर शिक्षा विभाग को शिकायत किया जा चुका है, और कुछ वर्षों बाद न्यायालय तहसीलदार देवभोग और बीआरसी भी स्कूल का निरीक्षण भी कर चुके हैं। लेकिन कई साल बीत चुके है अभी तक स्कूल भवन निर्माण हेतु किसी भी तरह की जानकारी अबतक सामने नहीं आई है, और न ही नई भवन निर्माण हेतु स्वीकृत किया गया है।

प्रशासन पर सवाल !

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिक्षा विभाग को शिकायत दी गई है, लेकिन अभी तक शासन-प्रशासन स्कूल की जर्जर , बुरी हालत को नजरंदाज कर रही हैं, अबतक नया भवन स्वीकृत नहीं होने से बच्चों को शिक्षक पेड़ के नीचे तो कभी आंगनबाड़ी केंद्र में कक्षा संचालित की जाती है। उक्त ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह की दुर्दशा से शिक्षा व्यवस्था हो रही है, जल्द से जल्द नयी भवन स्वीकृत किया जाए ताकि वनांचल क्षेत्र में निवासरत बच्चे स्कूल में पढ़ाई-लिखाई कर अच्छी शिक्षा और लाभदायिक से सुखमय जीवन को व्यतीत कर सके।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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