“नल तो लगे, पर पानी गायब: पथर्री में पाइपलाइन बनी ‘सूखी कहानी’”

गरियाबंद/फिंगेश्वर-:गरियाबंद जिले के पथर्री गांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना था, यहां जमीनी स्तर पर दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, गांव में नल-जल योजना के तहत कार्य बीते एक वर्ष से जारी है। योजना की समय-सीमा 9 महीने तय की गई थी, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी काम अधूरा पड़ा हुआ है। इसका सीधा असर गांव के सैकड़ों परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्हें आज तक इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते योजना अधर में लटकी हुई है। वर्तमान में ग्राम पंचायत द्वारा 11 नलकूपों के माध्यम से जल आपूर्ति की जा रही है, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हो रही। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल पाता।

स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब ग्रामीणों को मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग करना पड़ता है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बीते वर्षों में दूषित पानी के कारण लगभग 7 से 8 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, जिससे गांव में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने किडनी जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका भी जताई है।

15 अप्रैल को जिला प्रशासन द्वारा गांव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की जांच की गई थी। मौके पर पहुंचे कलेक्टर बी.एस. उइके एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्थिति का जायजा लिया और एहतियात बरतने के निर्देश दिए। साथ ही अधूरे नल-जल कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा।
ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर खासा आक्रोश है।

सरपंच प्रतिनिधि चुम्मन सिन्हा ने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया गया।

कमला बाई देवदास ने कहा कि पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है।

रेवा राम ध्रुव और हेमू राम साहू ने भी जल संकट को लेकर नाराजगी जताई।

किडनी मरीज लेखराम साहू ने बताया कि दूषित पानी का उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।

पथर्री गांव में अधूरी नल-जल योजना और बढ़ता जल संकट प्रशासनिक दावों की हकीकत उजागर कर रहा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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