प्रकृति हर्बल गुलाल से रचाई आत्मनिर्भरता की डोर: अमलीपदर की महिलाएं बनीं सफलता की मिसाल 

सफलता की कहानी 

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पालक हरी सब्जियां, लाल भाजी,पलास फूल से बनी हस्त निर्मित गुलाले बनी आजिविका का साधन

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राजधानी से जनता तक/ चरण सिंह क्षेत्रपाल

 

गरियाबंद/अमलीपदर – रंगों का त्यौहार होली जहां रंग-बिरंगे रंगों से खेली जाने वाली स्नेह का पर्व है। वहीं गरियाबंद जिले के अमलीपदर की महिला स्व-सहायता समूह कलस्टर में बिहान से जुड़े हुए बहनें इस बार हर्बल गुलाले बना रही है। गौरतलब है कि इस बार गुलाल प्राकृतिक रंगों से खूशबू आएगी। और इन गुलालों को हरे भरे सब्जियां और लाल भाजी,पलास के फूल से पीले रंग की गुलाल बना रही है। स्पष्ट यह है कि इस बार ग्रामीण महिलाओं ने केमिकल विहीन हर्बल गुलाले बना रही है। पिछले साल 20 से 50 किलो प्रकृति हर्बल गुलाले बनाई थी। इस साल काफी ज्यादा मात्रा में लोग केमिकल विहीन हर्बल गुलाले पसंद की है।यह पर्व महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है। अमलीपदर संकुल की स्व-सहायता समूह की महिलाएं इस पावन पर्व को अपनी आजीविका और पहचान से जोड़ रही है।इन समूह की मेहनती दीदियां द्वारा प्रकृति से बनी हर्बल गुलाले को बेचने के लिए बाजार को जाना पड़ता था लेकिन अब जिस तरह से मांगें बड़ गई है कि लोग खरीददारी करने रीपा सेंटर तक पहुंच रहे है। उन्होंने बताया कि इस बार 2 क्विंटल की मांग हो गई है।ये गुलाले न केवल पंरपरा और संस्कृति को जीवंत रख रही है। बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रही है। समूह की महिलाएं न सिर्फ निर्माण कर रही है। बल्कि बिक्री का जिम्मा भी खुद सम्भाल रही है। कुछ महिलाएं अपनी घर के दुकानों में बेचती है। इस पहल से उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है। और उसमें आत्मसम्मान , रचनात्मकता तथा सामूहिक सहयोग की भावना मजबूत हो रही है। अब गुलाल सिर्फ रंगों का तैयार करना नहीं बल्कि गांव की महिलाओं के लिए आत्मबल ,हुनर और उम्मीदों की किरण जाग उठी है। मैनपुर की यह पहल जिले भर की महिलाओं के लिए एक नई प्रेरणा बनकर उभर रही है। गुलालों से रोजगार तक महिला शक्ति की नई उड़ान।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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