प्राकृतिक खेती से पोषण वाटिका तक: भेलवापाल में किसानों को मिला समग्र कृषि ज्ञान

जिला प्रमुख नवीन दांदडें

सुकमा । जिले के ग्राम भेलवापाल में आयोजित एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम ने ग्रामीण किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की दिशा में नई सोच प्रदान की। कार्यक्रम में 50 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण और उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीकों की विस्तृत जानकारी हासिल की।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना और उनकी आय को स्थायी रूप से बढ़ाना रहा। कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती प्रभारी डॉ. योगेश कुमार सिदार ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरता घटती है, लागत बढ़ती है और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर देते हुए इसके दीर्घकालिक लाभों को सरल भाषा में समझाया।
डॉ. सिदार ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र और दशपर्णी अर्क तैयार करने की विधियां व्यावहारिक रूप से समझाईं। साथ ही उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधार पर विशेष बल देते हुए मिट्टी का नमूना लेने की वैज्ञानिक प्रक्रिया और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषण प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत को भी कम किया जा सकता है।
वहीं उद्यानिकी विशेषज्ञ डॉ. गुंजेश्री गोंड ने ग्रीष्मकालीन सब्जियों की उन्नत खेती पर जानकारी देते हुए किसानों को मौसम के अनुसार फसल चयन, सिंचाई प्रबंधन और देखभाल के बेहतर तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने किसानों को अपने घर के आसपास पोषण वाटिका विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जिससे परिवार को वर्षभर ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकें और महिलाओं एवं बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हो।
डॉ. गोंड ने देसी सब्जियों के बीज संरक्षण और संवर्धन पर भी जोर दिया, ताकि स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके। कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी सुरेश कुमार बैक, उद्यान अधीक्षक नवस तिग्गा, आत्मा परियोजना से श्रीमती ज्योति गावड़े, श्रीमती प्रतिमा, श्री रोहित सलाम एवं परमेश सिंह सोरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाएं। यह प्रशिक्षण न केवल किसानों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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