वनांचलों में ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ और ‘सुशासन तिहार’ से बदला माहौल

जमीन पर चौपाल लगाकर बैठे कलेक्टर और सीईओ, ग्रामीणों की सुनीं समस्याएं

अफसरों ने ग्रामीणों के साथ ‘ट्रांसेक्ट वॉक’ कर जानी जमीनी हकीकत

जिला प्रमुख नवीन दांदडे

सुकमा/ जिले के सुदूर वनांचलों में इन दिनों शासन की संवेदनशीलता और सक्रियता का एक ऐसा प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिल रहा है, जिसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह मिटा दिया है। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार आयोजित ‘सुशासन तिहार’, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ एवं ‘जनभागीदारी अभियान’ के तहत छिंदगढ़, सुकमा और कोंटा विकासखंड के सभी गांवों में उत्सव जैसा माहौल है। इस विशेष अभियान का सीधा और स्पष्ट उद्देश्य जनजातीय समाज को सशक्त बनाना और विकास की मुख्यधारा से कटे अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है, ताकि कोई भी परिवार पीछे न छूटे।

इसी कड़ी में संवेदनशीलता की एक बेहद आत्मीय तस्वीर तब सामने आई, जब कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर ने छिंदगढ़ विकासखंड के सुर्रेपाल, जांगड़पाल और मुड़वाल गांवों में लगे सुशासन शिविरों का औचक निरीक्षण किया। किसी औपचारिक मंच पर बैठने के बजाय, दोनों शीर्ष अधिकारी सीधे जमीन पर चौपाल लगाकर ग्रामीणों के बीच बैठ गए। इस आत्मीय संवाद के दौरान कलेक्टर और सीईओ ने ग्रामीणों की समस्याओं और मांगों को बेहद संजीदगी से सुना और उनके त्वरित निराकरण के लिए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को कड़े व आवश्यक निर्देश दिए। जिले के सर्वोच्च अधिकारियों को अपने इतने करीब और इस सादगी में पाकर ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

इस पूरे अभियान की सबसे प्रभावशाली और प्रशासनिक बदलाव को दर्शाने वाली तस्वीर तब देखी गई, जब प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की टीम ने गांवों में ‘ट्रांसेक्ट वॉक’ (पैदल भ्रमण) किया। जब पूरी प्रशासनिक टीम ग्रामीणों के साथ उनके उबड़-खाबड़ रास्तों, संसाधनों और रोजमर्रा की जरूरतों को समझने के लिए खुद पैदल चलकर उनके मोहल्लों तक पहुंची, तो ग्रामीणों में यह मजबूत संदेश गया कि सरकार अब सिर्फ बंद कमरों से आदेश जारी नहीं कर रही, बल्कि खुद जमीन पर आकर समस्याओं को देख और परख रही है। इस पहल ने न केवल ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति अटूट भरोसा जगाया, बल्कि विकास योजनाओं को गांव की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप ढालने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

इन शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को बहुत बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें छोटे-मोटे कामों के लिए ब्लॉक मुख्यालयों के चक्कर काटने और आर्थिक बोझ उठाने से मुक्ति मिल गई है। शिविर स्थल पर ही डिजिटल सेवाएं, पहचान पत्र व सरकारी दस्तावेजों में सुधार और अपडेट जैसी जरूरी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सक्रिय मोर्चा संभालते हुए बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां बांटीं, जिससे ग्रामीणों में अपनत्व की भावना जागी। कृषि, महिला एवं बाल विकास और पंचायती राज जैसे विभिन्न विभागों के स्टॉलों के जरिए जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की सरल जानकारी दी गई। जनता की यह भारी भागीदारी गवाह है कि जब सरकार की मंशा जनहित की हो, तो सुशासन केवल कागजी शब्द नहीं, बल्कि गांव-गांव को बदलने वाली एक जीवंत ताकत बन जाता है।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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