“समाज को बदलने की जरूरत — निधि साहू”

 “महिलाएं मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री होती है- कुलपति मनोज दयाल”  

राजधानी से जनता तक/रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में आज सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय पत्रकारिता में महिलाओं की भूमिका पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपसचिव, लोकभवन निधि साहू रहीं। मुख्य वक्ता निधि साहू ने कहा कि समाज अक्सर महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा करता है, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज भी कर देता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हम महिला दिवस ही क्यों मनाते हैं? पुरुष दिवस पर उतनी चर्चा क्यों नहीं होती? इसी तरह पत्रकारिता में महिलाओं के योगदान पर तो चर्चा होती है, लेकिन परिवार में महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान पर पर्याप्त संवाद नहीं होता। जबकि वास्तविकता यह है कि परिवार की अवधारणा ही महिला से शुरू होती है।

निधि साहू ने बताया कि मानव सभ्यता के प्रारंभिक दौर से ही परिवार और समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न शोधों से यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग समाजों में महिलाओं की जिम्मेदारियाँ और योगदान हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। आदिम समाज से लेकर आधुनिक समाज तक, परिवार और सामाजिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बनी रही है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की कार्यशैली में एक विशेषता यह भी है कि वे मल्टीटास्किंग की क्षमता रखती हैं। वे एक साथ कई जिम्मेदारियों को निभाती हैं, जबकि पुरुषों का कार्य अक्सर एक ही क्षेत्र तक सीमित होता है। हालांकि आधुनिक समय में महिलाओं की दूसरों पर निर्भरता कम हुई है और वे आर्थिक व सामाजिक रूप से अधिक सशक्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग अपने घरों में ऐसी महिलाओं को स्वीकार नहीं करना चाहते जो पेशेवर जीवन में सक्रिय हों। यह मानसिकता समाज के विकास में बाधा बनती है। लोकभवन की उप-सचिव निधि साहू ने कहा कि महिलाओं पर मानसिक दबाव काफी अधिक होता है। घर और जॉब दोनों की जिम्मेदारियों को निभाने के कारण उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में समाज में जेंडर सेंसिटिविटी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महिलाओं के सशक्तिकरण में पुरुषों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इतिहास में कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पुरुषों ने भी आवाज उठाई और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। समाज में वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब महिलाओं की भूमिका को केवल पेशेवर क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि परिवार और सामाजिक संरचना के हर स्तर पर समान सम्मान और महत्व दिया जाए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विवि के कुलपति प्रो मनोज दयाल ने की। उन्हों ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला केवल परिवार का संचालन ही नहीं करती, बल्कि वह एक मनोवैज्ञानिक, समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री होती है। वह परिवार के सदस्यों की भावनाओं को समझती है, सामाजिक संबंधों को संतुलित रखती है और घर की आर्थिक व्यवस्था को भी संभालती है।

जानकारी हो कि कार्यक्रम के आरंभ में सहायक प्राध्यापक डॉ. नृपेंद्र शर्मा जी ने स्वागत भाषण में बताया कि भारतीय पत्रकारिता में महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है।

इस कार्यक्रम का संयोजन और संचालन सह प्रध्यापक डॉ. शैलेंद्र खंडेलवाल जी ने किया और कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में विवि के उप कुलसचिव, समस्त शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

ISHWAR NAURANGE
Author: ISHWAR NAURANGE

🗞️ दैनिक राजधानी से जनता तक — राजधानी की सत्ता, प्रशासन और नीति-निर्णयों की हर सच्चाई सीधे जनता तक पहुँचाने का संकल्प। जनहित, ज़मीनी मुद्दे, सामाजिक सरोकार और निष्पक्ष पत्रकारिता हमारी पहचान। ✍️ सच के साथ, जनता के पक्ष में।

यह भी पढ़ें

[democracy id="1"]
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  

टॉप स्टोरीज