चार साल से अधूरा भवन, राशि खर्च या गबन? जवाब दे प्रशासन!
छुईखदान। ग्राम पंचायत देवरचा के आश्रित ग्राम लावातरा में प्राथमिक शाला के अतिरिक्त कक्ष का अधूरा निर्माण अब सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन की योजनाओं में संभावित भ्रष्टाचार और जवाबदेही के अभाव का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत वर्ष 2021-22 में स्वीकृत अतिरिक्त कक्ष आज भी अधूरा खड़ा है, जबकि चार साल का लंबा समय बीत चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने पैसा दिया, तो भवन क्यों नहीं बना? और यदि पैसा खर्च नहीं हुआ तो वह कहां है? अगर खर्च हुआ तो अधूरा निर्माण किसकी नाकामी और किसके संरक्षण में हुआ?
बच्चे भुगत रहे भ्रष्टाचार की सजा
जिन बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भवन मिलना था, वे आज भी संसाधनों के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल का अधूरा भवन रोज यह सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ बच्चों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के नाम पर राशि निकाल ली गई और काम अधूरा छोड़ दिया गया। यदि यह आरोप सही हैं तो यह सीधे-सीधे बच्चों के अधिकारों और सरकारी धन के साथ खिलवाड़ का मामला है।
शिकायतों पर भी नहीं जागा प्रशासन
ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है। आखिर ऐसा क्या कारण है कि चार साल में न जांच हुई, न कार्रवाई हुई और न ही निर्माण पूरा कराया गया? क्या शिकायतें सिर्फ फाइलों में दबाने के लिए ली जाती हैं? क्या दोषियों को बचाने के लिए प्रशासनिक मौन साधा गया है? या फिर पूरा मामला प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में दबाया जा रहा है?
ग्रामीणों का अल्टीमेटम
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे कलेक्टर कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे। लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामले को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
सबसे बड़ा सवाल
क्या लावातरा के बच्चों का भविष्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है?
क्या सरपंच, सचिव और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा या फिर अधूरा स्कूल आगे भी भ्रष्टाचार की गवाही देता रहेगा?
आखिर कार्रवाई कब होगी?
जब एक सामान्य नागरिक से छोटी सी गलती पर तत्काल वसूली और कार्रवाई हो सकती है, तो लाखों रुपये की सरकारी योजना अधूरी छोड़ने वालों पर चार साल बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
यह सवाल अब सिर्फ लावातरा गांव का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है।
जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अधूरा स्कूल हर दिन प्रशासन से पूछता रहेगा— “मेरी दीवारें अधूरी हैं, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही कब पूरी होगी?”




