जिला अस्पताल में सामान्य दवा तक नहीं — मरीज परेशान, प्रबंधन पर उठे सवाल

सुकमा-जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल सुकमा में बुधवार सुबह एक बार फिर व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। पेट दर्द से तड़प रही एक युवती को डॉक्टर ने Pentop 40 mg गैस का इंजेक्शन लगाने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में यह सामान्य और रोज़ाना उपयोग होने वाली दवा तक उपलब्ध नहीं थी।

डॉक्टर ने परिजनों को पर्ची थमा दी और मजबूर होकर उन्हें बाहर से दवा खरीदनी पड़ी। सुबह का समय था, इसलिए पास की मेडिकल दुकान से दवा मिल गई—अन्यथा परिजनों को सुकमा बाज़ार तक भटकना पड़ सकता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दो साल पहले जिला अस्पताल में लगभग सभी आवश्यक दवाएँ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती थीं, लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि सामान्य दवाई भी स्टॉक में नहीं है। इससे लोगों का अस्पताल पर भरोसा लगातार कम होता जा रहा है।

दवा की कमी के पीछे जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही है या रायपुर से सप्लाई में देरी—यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन सच यह है कि मरीजों को इससे भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

क्षेत्र में नक्सलवाद अब कमजोर पड़ रहा है, ऐसे में सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने पर होना चाहिए था। लेकिन जिला मुख्यालय का अस्पताल ही यदि दवा संकट से जूझ रहा है, तो आम जनता की उम्मीदें किससे लगाई जाएँ?

लोगों का कहना है कि केवल “ट्रिपल इंजन सरकार” कह देने से नहीं होगा—जमीन पर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। स्वास्थ्य सेवाएँ सुधरेंगी तो ही बाकी विभागों के कर्मचारी और अधिकारी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम कर पाएँगे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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