गरियाबंद(देवभोग): गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्र देवभोग में स्थित शासकीय आईटीआई इस समय प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा केंद्र बन चुका है। राज्य निर्माण के इतने वर्षों बाद भी, यह संस्था बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी के चलते ‘राम भरोसे’ चल रही है। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहाँ के छात्र अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं और अब ग्रामीण व पूर्व छात्र सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

’शून्य’ नियमित स्टाफ, मेहमान प्रवक्ताओं के सहारे संस्था
सरकारी रिकॉर्ड में देवभोग आईटीआई में 3 ट्रेडों में 6 यूनिट्स स्वीकृत हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि यहाँ एक भी ‘नियमित’ प्रशिक्षण अधिकारी (TO) तैनात नहीं है। पूरी संस्था महज मेहमान प्रवक्ताओं (गेस्ट फैकल्टी) और एक संविदा शिक्षक के भरोसे घिसट रही है।
कोपा ट्रेड में सबसे बदहाल स्थिति
कंप्यूटर युग में डिजिटल शिक्षा की उम्मीद लेकर सबसे ज्यादा युवाओं ने कोपा (COPA) ट्रेड में दाखिला लिया था। लेकिन यहाँ गाइड करने के लिए कोई स्थायी शिक्षक ही नहीं है। थ्योरी और प्रैक्टिकल कक्षाएं पूरी तरह ठप हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
पढ़ाई के नाम पर ‘नाम काटने’ का खेल
संस्था की लचर व्यवस्था का शिकार छात्र-छात्राएं हो रहे हैं। जब छात्रों को समय पर कक्षाएं नहीं मिलतीं, तो वे धीरे-धीरे कॉलेज आना बंद कर देते हैं। इस पर संस्था प्रबंधन सुधार करने के बजाय नियमों का हवाला देकर छात्रों की अनुपस्थिति पर उनका नाम काट (ड्रॉपआउट) दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि व्यवस्था की नाकामी का खामियाजा गरीब आदिवासी छात्रों को एक साल बर्बाद करके भुगतना पड़ रहा है।
80 किमी दूर बैठा है ‘प्रभारी प्राचार्य’
संस्था की बदहाली का एक बड़ा कारण यहाँ का नेतृत्व है। देवभोग आईटीआई में कोई भी नियमित प्राचार्य नहीं है। संस्था का संचालन 80 किलोमीटर दूर बैठे प्रभारी प्राचार्य के माध्यम से किया जा रहा है, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर समस्या सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है।
आर-पार की लड़ाई के मूड में ग्रामीण और छात्र
इस अव्यवस्था के खिलाफ अब ग्रामीणों, पालकों, पूर्व छात्रों और विभिन्न छात्र संगठनों का सब्र का बांध टूट गया है। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है की सबसे ज्यादा छात्र संख्या वाले ‘कोपा ट्रेड’ में तत्काल नियमित शिक्षक की नियुक्ति हो।
संस्था के लिए स्थानीय स्तर पर एक स्थायी प्राचार्य की तैनाती की जाए।
चेतावनी: स्थानीय निवासियों और छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन ने तत्काल इन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगी।






