सलवा जुडूम के समय से बंद था मंदिर — भक्ति, आस्था और सनातन संस्कृति का हुआ पुनर्जागरण
जिला प्रमुख नवीन दांदडें
सुकमा – नक्सल आतंक के कारण लगभग 24 वर्षों से बंद पड़े पोलमपल्ली के ऐतिहासिक राम मंदिर में एक बार फिर भक्ति की ज्योति प्रज्वलित हो उठी। वर्षों बाद वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन और “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में भी ऐतिहासिक बन गया।
सलवा जुडूम के दौर से यह मंदिर बंद पड़ा था। नक्सल प्रभाव के चलते सुकमा जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियाँ लगभग ठप हो गई थीं। लेकिन केंद्र एवं राज्य सरकार की सशक्त नक्सल-विरोधी रणनीति और सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई से क्षेत्र में शांति बहाल हुई है। इसी सकारात्मक माहौल के बीच राम मंदिर में पुनः नियमित पूजा-अर्चना का शुभारंभ ग्रामीणों के लिए आत्मविश्वास और नई उम्मीद का प्रतीक बनकर सामने आया।
वैदिक मंत्रों से गूंजा पोलमपल्ली
पूजा-अर्चना का शुभारंभ विधिवत वैदिक अनुष्ठानों के साथ किया गया। यज्ञ-हवन के दौरान मंत्रोच्चार से वातावरण पवित्र और ऊर्जावान हो उठा। हनुमान चालीसा के पाठ और श्रीराम भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर यज्ञ स्थल की परिक्रमा करते नजर आए। वर्षों बाद यह दृश्य देखकर ग्रामीणों की आंखों में श्रद्धा, संतोष और गर्व साफ झलक रहा था।
दीपिका शोरी की भावुक उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य एवं आदिवासी नेत्री अधिवक्ता दीपिका शोरी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। मंदिर परिसर में पहुंचते ही वे भावुक हो उठीं और श्रद्धा से प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना कर यज्ञ में आहुति दी। उन्होंने क्षेत्र में शांति, समृद्धि और विकास की कामना की।
विशेष क्षण तब देखने को मिला जब दीपिका शोरी ने स्वयं हनुमान चालीसा का पाठ किया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उनके साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। ग्रामीणों ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि उनके धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता निभाते हैं, तो समाज में आत्मविश्वास और एकजुटता स्वतः बढ़ती है।
सनातन संस्कृति की लौ फिर हुई प्रज्वलित
राम मंदिर में पुनः पूजा प्रारंभ होना केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और आत्मसम्मान के पुनरुत्थान का प्रतीक है। लंबे समय से भय और असुरक्षा के साये में जी रहे ग्रामीणों के लिए यह आयोजन नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच लेकर आया है।
नक्सलमुक्ति के साथ लौट रही धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां
क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ ही धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का पुनः प्रारंभ होना विकास, स्थायित्व और शांति का संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि श्रीराम की कृपा से क्षेत्र में सद्भाव, शांति और समृद्धि का मार्ग और अधिक प्रशस्त होगा।
रामभक्तों ने दीपिका शोरी से की मंदिर में हैंडपंप की मांग
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में पेयजल की गंभीर समस्या को लेकर आयोग सदस्य दीपिका शोरी के समक्ष मांग रखी। रामभक्तों ने बताया कि पूर्व में जब मंदिर संचालित था, तब भी पानी की कमी बनी रहती थी, जो आज भी यथावत है। उन्होंने एक हैंडपंप की व्यवस्था की मांग की, जिस पर दीपिका शोरी ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
रामायण मंडलियों ने की वाद्ययंत्र एवं साउंड सिस्टम की मांग
इस धार्मिक अनुष्ठान में तोंगपाल से लेकर कोंटा तक की विभिन्न रामायण मंडलियों ने सहभागिता की। मंडली सदस्यों ने अपने कार्यक्रमों के लिए वाद्ययंत्र एवं साउंड बॉक्स की मांग रखी। इस पर दीपिका शोरी ने राज्य सरकार की योजनाओं के अंतर्गत उन्हें लाभ दिलाने हेतु शासन से पत्राचार कर पहल करने का भरोसा दिलाया।
निष्कर्ष:
हनुमान चालीसा की गूंज, “जय श्रीराम” के उद्घोष और यज्ञ की पवित्र अग्नि के बीच पोलमपल्ली ने आस्था, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के ऐतिहासिक क्षण को साक्षी बनाया। 24 वर्षों बाद मंदिर में पुनः पूजा प्रारंभ होना पूरे क्षेत्र के लिए नई शुरुआत और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बन गया।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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