मुरता समिति का ‘ब्लू स्टार’ रहस्य: 7 किसानों से शुरू हुआ मामला, फिर लाखों की अमानत राशि किसने घटाई?

ब्लू स्टार का संचालन कौन करता था? पूर्व प्रभारी प्रबंधक राजेंद्र पांडेय ने रामकुमार साहू की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

राजधानी से जनता तक/बेमेतरा – सेवा सहकारी समिति मर्यादित मुरता में कथित “ब्लू स्टार” और किसानों की अमानत राशि में कटौती का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व प्रभारी समिति प्रबंधक राजेंद्र कुमार पांडेय ने दावा किया है कि समिति में ब्लू स्टार संबंधी कार्यों का संचालन मुख्य रूप से रामकुमार साहू के माध्यम से होता था, ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि किसानों की अमानत राशि में हुई कथित कटौतियों और वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार कौन है?

 

राजेंद्र पांडेय का कहना है कि नवंबर 2023 से उनकी स्वास्थ्य स्थिति खराब रहने के कारण समिति में उनकी सक्रियता काफी कम हो गई थी। जून 2024 में कार्यभार संभालने के बाद भी बीमारी के चलते उनका समिति में आना-जाना सीमित रहा। इस दौरान अधिकांश तकनीकी और संचालन संबंधी कार्य संबंधित कर्मचारियों द्वारा किए जाते रहे।

 

*सिर्फ 7 किसानों का मामला या फिर बड़ा खेल?*

 

पूर्व प्रभारी प्रबंधक ने स्वीकार किया है कि उनके कार्यकाल में 7 किसानों के ब्लू स्टार संबंधी कार्य किए गए थे, लेकिन उनका कहना है कि यह कार्य भी संबंधित कर्मचारी की सहमति और सहयोग से हुआ था। उनका आरोप है कि इसी प्रक्रिया का लाभ उठाकर बाद में बड़े पैमाने पर किसानों की अमानत राशि में कटौती की गई।

 

अब सवाल उठ रहा है कि यदि ब्लू स्टार संचालन और अमानत खातों में संशोधन का अधिकार व्यवहारिक रूप से एक ही व्यक्ति के पास था, तो फिर किसानों की राशि में कथित रूप से हुई लाखों रुपये की कमी के पीछे जिम्मेदार कौन है?

 

*35 से 38 लाख रुपये की गड़बड़ी के आरोप*

 

राजेंद्र पांडेय का आरोप है कि किसानों की अमानत राशि में लगभग 35 से 38 लाख रुपये तक की कटौती और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन आरोपों ने सहकारिता विभाग में हलचल जरूर पैदा कर दी है।

 

*सबसे बड़ा सवाल: ब्लू स्टार चला कौन रहा था?*

 

मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह बनकर उभरा है कि—

 

ब्लू स्टार संचालन का वास्तविक जिम्मेदार कौन था?

 

अमानत खातों में कटौती किसके लॉगिन अथवा प्रक्रिया से हुई?

 

किसानों की राशि कम होने की जानकारी किसे थी?

 

समिति के रिकॉर्ड और डिजिटल प्रविष्टियों की जवाबदेही किसकी बनती है?

 

यदि अनियमितता हुई है तो उसका लाभ किसे मिला?

 

 

*उच्च स्तरीय जांच की मांग*

 

राजेंद्र पांडेय ने प्रदेश या संभाग स्तर की स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि समिति के संपूर्ण रिकॉर्ड, अमानत खातों और ब्लू स्टार से संबंधित दस्तावेजों की जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी। उनका कहना है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

 

*जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई*

 

फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। किसानों के हितों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब सभी की नजर सहकारिता विभाग और जांच एजेंसियों पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमानत राशि में कथित कटौती और ब्लू स्टार से जुड़े विवाद के पीछे वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

 

“मुरता समिति में लाखों की अमानत राशि आखिर किसने घटाई? ब्लू स्टार का संचालन कौन कर रहा था? और किसानों के पैसे का हिसाब कौन देगा?” — यही वे सवाल हैं जिनके जवाब अब जांच से ही सामने आ सकेंगे।

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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