महिला अधिकारी को अधिकार से वंचित करना बर्दाश्त नहीं, शिक्षक बोले – लड़ेंगे सड़क से सदन तक लड़ाई”

बम्हनीडीह में बीईओ प्रभार विवाद पर शिक्षकों ने दिखाई एकजुटता, आंदोलन की चेतावनी

जांजगीर-चांपा ज़िले के बम्हनीडीह ब्लॉक में बीईओ प्रभार को लेकर उठा विवाद अब शिक्षक समुदाय के लिए सम्मान और अधिकार की लड़ाई बनता जा रहा है। ब्लॉक में कार्यरत महिला एबीईओ रत्ना थवाईत को प्रभारी बीईओ न बनाए जाने से आक्रोशित शिक्षकों ने शनिवार को बिर्रा क्षेत्र के तीन संकुलों की बैठक में सख्त तेवर दिखाए। शिक्षकों ने एक स्वर में कहा – “रत्ना थवाईत नहीं, तो कोई नहीं।” शिक्षकों ने एकजुटता दिखाते हुए विभाग की मनमानी बंद करने सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ने की मंशा जाहिर कर दी है।

बैठक में शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि यदि बलौदा के एबीईओ ललित जाटवर को दिया गया प्रभारी बीईओ का आदेश रद्द नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करेंगे। शिक्षकों ने डीईओ पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिला अधिकारी को नजरअंदाज कर नियमों के खिलाफ निर्णय लिया है। जबकि रत्ना थवाईत ने पहले ही कलेक्टर और डीईओ को आवेदन देकर प्रभार की मांग की थी।

शिक्षकों ने यह मुद्दा अब सिर्फ पद का नहीं बल्कि महिला अधिकारी के सम्मान और अधिकार से जुड़ा बताया। शिक्षकों का कहना है कि यदि रत्ना थवाईत जैसी योग्य और कार्यशील महिला अधिकारी को सिर्फ महिला होने की वजह से दरकिनार किया जा रहा है, तो यह अस्वीकार्य है।

बैठक में लखन कश्यप, उत्तम साहू, रामकिशोर देवांगन, मीनाक्षी कश्यप, बीना डड़सेना सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए और आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की।

शिक्षकों का साफ कहना है – “अगर महिला अधिकारी को उसका हक नहीं मिलेगा, तो हम सब खामोश नहीं रहेंगे… ज़रूरत पड़ी तो हर स्तर की लड़ाई लड़ेंगे।”

Rajdhani Se Janta Tak
Author: Rajdhani Se Janta Tak

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