चन्द्रदीप यादव/राजधानी से जनता तक/बलरामपुर, रामानुजगंज
बलरामपुर :- सामुदायिक भवन कुसमी में आयोजित की गई। आज दिनांक 26 अप्रैल 2026 को चिक बड़ाईक समाज की जिला स्तरीय बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष बुधन बुनकर जी ने की एवं मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय चिक बड़ाईक महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष बसंत बुनकर उपस्थित रहे।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना में चिक बड़ाईक जाति वर्ग को अनुसूचित जनजाति एवं धर्म के कॉलम में ‘आदिवासी’ लिखवाया जाएगा।
मुख्य अतिथि बसंत बुनकर ने भारत की जनगणना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की जनगणना अपनी समृद्ध परंपरा के कारण विश्व की सर्वश्रेष्ठ जनगणनाओं में से एक है। यह विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में शामिल है। जनगणना भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची (अनुच्छेद 246) में क्रम संख्या 69 पर अंकित है तथा जनगणना अधिनियम 1948 इसके संचालन का विधिक आधार प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि भारत में प्रथम जनगणना वर्ष 1872 में कराई गई थी। वर्ष 1881 में पहली बार संपूर्ण देश में एक साथ जनगणना हुई। इसके पश्चात 2011 तक प्रत्येक 10 वर्ष में बिना किसी व्यवधान के जनगणना होती रही। तथापि कोविड-19 के कारण भारत की जनगणना 2021 नियमित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित नहीं की जा सकी। भारत की जनगणना 2027, वर्ष 1872 से अब तक की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी।
इस महान ऐतिहासिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए चिक बड़ाईक समाज ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने के लिए मातृ भाषा/बोली का उल्लेख अवश्य करने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय युवा उपाध्यक्ष संतोष इंदवार ने कहा कि हमें अपनी जातिगत विशिष्टता बनाए रखने के लिए सांस्कृतिक पहचान और रीति-रिवाज को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते रहना चाहिए। संगठन महामंत्री खसरु बुनकर ने ग्राम स्तर पर मजबूत संगठन निर्माण कर अनुशासन में रहने पर बल दिया।
कृष्णपाल बड़ाईक, शिवनाथ बड़ाईक, दयाराम एवं गोपाल राम ने भी संबोधित कर सामाजिक एकता पर जोर दिया।
सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि वर्ष 2027 की जनगणना में धर्म के कॉलम में ‘आदिवासी’ लिखा जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सचिव दीपक बुनकर ने किया। बैठक में ब्लाक अध्यक्ष मनबोध बुनकर, उपाध्यक्ष इन्दरसाय, महामंत्री अजित बड़ाईक, महेश बुनकर, मंशु मोख्तार, सतीश बुनकर, बबलू बुनकर, भगतू बुनकर,हीरालाल, गुसु राम, हीरामन, बिन्दे, गंगाराम बुनकर, रविशंकर, सुरेश, रविंद्र, फुलेश्वर, कृष्णा, प्रदीप बड़ाईक, जोहन राम, बहादुर राम, रुपदेव, कैलाश राम, सुदामा बुनकर, सुमित्रा एवं कुसमी, शंकरगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
Author: Rajdhani Se Janta Tak
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