छुईखदान वन परिक्षेत्र में वित्तीय गड़बड़ी का मामला गरमाया : जांच अंतिम चरण में, कई अधिकारियों पर निलंबन की आंच

 

छुईखदान। छुईखदान में वन विभाग में हुए एक बड़े वित्तीय अनियमितता मामले के सामने आने के बाद विभागीय हलकों में हलचल तेज हो गई है। लगातार शिकायतों और मीडिया की सक्रिय निगरानी के बाद अब जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, वन मंडलाधिकारी (छुईखदान) खैरागढ़ द्वारा मामले की विस्तृत जांच कराई गई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच टीम ने जब ग्रामीण स्तर पर मजदूरों के बयान दर्ज किए, तो कई दस्तावेजी दावों पर सवाल खड़े हो गए। रिकॉर्ड में जिन बुजुर्ग महिलाओं को विभिन्न कार्यों में मजदूरी करते दिखाया गया था, उनके बयान वास्तविकता से मेल नहीं खा सके। बताया जा रहा है कि करीब 65 से 70 वर्ष की महिलाओं के नाम मास्टर रोल में दर्ज कर भुगतान दर्शाया गया, जबकि मौके पर तथ्य अलग पाए गए।

मामले का सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब जांच में शामिल कुछ श्रमिक वनरक्षकों के करीबी रिश्तेदार बताए गए। आरोप है कि सरकारी राशि नियमों को दरकिनार कर परिचितों और परिजनों के खातों में पहुंचाई गई। इससे फर्जी मास्टर रोल और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट में वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर), सहायक परिक्षेत्र अधिकारी तथा संबंधित वनरक्षकों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया है। विभागीय नियमों के अनुसार परिक्षेत्र में किए गए कार्यों और भुगतान की अंतिम जिम्मेदारी वन परीक्षेत्र  अधिकारी यानी रेंजर की मानी जाती है।

मुख्य बिंदु

फर्जी मास्टर रोल के जरिए मजदूरी भुगतान का मामला उजागर , बुजुर्ग और रिश्तेदारों के नाम पर कथित वित्तीय हेरफेर , विभागीय जांच अंतिम चरण में , उच्च अधिकारियों को निलंबन संबंधी प्रतिवेदन भेजे जाने की तैयारी , वन विभाग के भीतर बढ़ी हलचल, आधिकारिक आदेश का इंतजार

Deendyal Yadav
Author: Deendyal Yadav